
रांची । राजधानी रांची सहित राज्य के विभिन्न जिलों में बुधवार को करमा महोत्सव बड़े उत्साह और पारंपरिक आस्था के साथ मनाया गया। यह पर्व न केवल आदिवासी समाज की गहरी सांस्कृतिक धरोहर है, बल्कि भाई-बहन के पवित्र रिश्ते, सामूहिक जीवन मूल्यों और प्रकृति संरक्षण का भी प्रतीक माना जाता है। सुबह से ही अखरों (सामुदायिक पूजा स्थलों) में वातावरण भक्तिमय और उल्लासपूर्ण बना रहा।
बुधवार तड़के से ही महिलाएं और युवा करम पेड़ की डाल (करम डाली) लेकर विभिन्न अखरों में पहुंचे। वहां पाहन (जनजातीय पुजारी) की अगुवाई में विशेष अनुष्ठान संपन्न हुआ। परंपरा के तहत सबसे पहले ‘जावा’ की पूजा की गई। ‘जावा’ यानी धान या अन्य बीजों को मिट्टी में रोपकर अंकुरित किया जाता है और इसे नई फसल तथा जीवन की समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। श्रद्धालुओं ने आने वाले मौसम में अच्छी उपज, परिवार की खुशहाली और भाई-बहन के रिश्ते की मजबूती की कामना की।
