नयी दिल्ली:  प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बुधवार को उच्चतम न्यायालय में कहा कि अधीनस्थ अदालत के न्यायधीश ‘जल्दबाजी’ में थे और उन्होंने कथित आबकारी नीति घोटाले से जुड़े धनशोधन के मामले में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की जमानत का विरोध करने के लिए अभियोजक को उचित समय नहीं दिया।

संघीय जांच एजेंसी ने कहा कि केजरीवाल को नियमित जमानत देने संबंधी अधीनस्थ अदालत का 20 जून का आदेश धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) की धारा 45 के तहत पूर्वापेक्षित अनिवार्य शर्तों का पालन न करने के कारण ‘प्रतिकूल’ था।

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