रांची। झारखंड में जेपीएससी-जेएसएससी परीक्षा में गड़बड़ी के खिलाफ 14 दिनों से चल रहे छात्र आंदोलन के बीच शुक्रवार शाम को राज्य सरकार और छात्रों के एक प्रतिनिधिमंडडल के बीच पहली औपचारिक वार्ता हुई। मोरहाबादी स्थित राजकीय अतिथिशाला में हुई बैठक करीब डेढ़ घंटे चली, जो रात 9.25 बजे खत्म हुई। छात्र प्रतिनिधियों ने बातचीत को सकारात्मक बताया। हालांकि, बातचीत अंतिम समझौते पर नहीं पहुंची है। छात्रों ने अंतिम रूप से समझौता होने और अपनी मांगें पूरी होने तक सत्याग्रह जारी रखने का निर्णय लिया है।

सरकार की पांच सदस्यीय टीम और छात्रों के 10 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल के बीच आमने-सामने बातचीत हुई। छात्रों ने अपनी मांगों का एक-एक बिंदु सरकार के सामने रखा। उन्होंने भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता, कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच और परीक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग दोहराई। छात्रों ने कहा कि वे ठोस कार्रवाई की उम्मीद कर रहे हैं। वार्ता में सरकार की ओर से चार मंत्री शामिल हुए। इनमें चमरा लिंडा, सुदिव्य कुमार सोनू, दीपिका पांडेय सिंह और संजय प्रसाद यादव शामिल थे। विकास आयुक्त अजय कुमार सिंह भी बैठक में मौजूद रहे।

छात्र प्रतिनिधिमंडल में रवींद्र पासवान, पीयूष कुमार, राजेश प्रसाद, नीतू कुजूर, अंकित राज, कार्तिक सोरेन, शालू कुमारी, रवींद्र कुमार रवि, आनंद कुमार और अंकित कुमार शामिल थे। मंत्रियों ने छात्रों की मांगों पर कहा कि सरकार छात्रों के एक-एक मुद्दे के समाधान की दिशा में सकारात्मक कदम उठाएगी। माना जा रहा है कि सरकार के चार मंत्रियों की कमेटी मुख्यमंत्री को छात्रों की मांगों से अवगत कराएगी। जल्द ही दूसरे दौर की वार्ता हो सकती है।


जेपीएससी, जेएसएससी सहित विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के विरोध में जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में चल रहे छात्र आंदोलन के बीच शुक्रवार देर रात प्रशासन और छात्रों के बीच करीब दो घंटे तक वार्ता हुई। रात करीब 11 बजे एडीएम लॉ एंड आॅर्डर धनंजय कुमार और एसडीओ कुमार रजत धरनास्थल पहुंचे और आंदोलनकारी छात्रों को समझाने का प्रयास किया।

सरकार से लिखित मांगा आश्वासन : वार्ता के दौरान प्रशासन की ओर से छात्रों को उनकी मांगों पर विचार करने का आश्वासन दिया गया। हालांकि आंदोलनकारी छात्रों का कहना था कि उनकी किसी भी मांग पर स्पष्ट सहमति नहीं बनी है और केवल विचार करने की बात कही गई है। छात्रों ने मौखिक आश्वासन स्वीकार करने से इनकार करते हुए मांगों पर लिखित आश्वासन देने की मांग रखी। लिखित भरोसा नहीं मिलने के कारण छात्रों ने आंदोलन जारी रखने का फैसला किया। देर रात वार्ता के बाद कुछ समय के लिए छात्रों के बीच असमंजस की स्थिति भी बनी रही। चर्चा थी कि सरकार ने मांगें मान ली हैं, लेकिन आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया कि जब तक लिखित आदेश या आधिकारिक आश्वासन नहीं मिलता, तब तक धरना और अनशन जारी रहेगा।

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन बोले-सरकार बात सुनने को तैयार

वार्ता से पहले मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने विधानसभा परिसर में कहा कि सरकार छात्रों की समस्याओं को लेकर संवेदनशील है। सरकार छात्रों की हर बात सुनने को तैयार है। बातचीत के जरिए समाधान निकाला जा सकता है। छात्रों के सवाल, सुझाव और जिज्ञासाएं खुलकर सामने आनी चाहिए। उनके सुझावों का सरकार स्वागत करेगी।

उन्होंने कहा कि युवाओं की भागीदारी से भर्ती और शिक्षा व्यवस्था में बड़े सुधार किए जा सकते हैं। संवाद किसी एक स्थान या सीमित समूह तक नहीं रहना चाहिए। राज्य के सभी छात्र अपनी राय रखें। उनके विचारों के आधार पर सरकार सुधार की दिशा में आगे बढ़ना चाहती है।

Share.
Leave A Reply

Exit mobile version