
रांची। हाई कोर्ट के जस्टिस दीपक रोशन की अदालत में जेपीएससी की 11-13वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा, खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी नियुक्ति परीक्षा तथा सीडीपीओ नियुक्ति परीक्षा और जेएसएससी की सीजीएल परीक्षा से हुई नियुक्तियों को रद करने के सरकार के आदेश के विरुद्ध दाखिल याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई हुई। इस दौरान राज्य सरकार ने शपथपत्र के माध्यम से इन परीक्षा रद करने के कारणों को बताया। सरकार ने अपने जवाब में कहा कि पूरी नियुक्ति प्रक्रिया दूषित हो चुकी थी, इसलिए नियुक्ति प्रक्रियाओं को रद किया। बकायदा इसे लेकर सर्वोच्च न्यायालय के एक आदेश का हवाला दिया। इधर, सुनवाई के बाद अदालत ने सीआईडी की एसआईटी जांच की निगरानी के लिए हाई कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस गौतम कुमार चौधरी को मानिटर (आॅब्जर्वर) नियुक्त किया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि जांच के दौरान किसी अभ्यर्थी को उत्पीड़न की शिकायत हो तो वह सेवानिवृत्त जस्टिस गौतम कुमार चौधरी के समक्ष शिकायत कर सकता है। इधर, अदालत ने सरकार द्वारा दाखिल शपथपत्र पर प्रार्थी अभ्यर्थियों को जवाब देने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई सात अक्टूबर को होगी।



कोर्ट ने यह भी कहा कि मानिटर और नोडल की व्यवस्था से एसआईटी की जांच प्रभावित नहीं होगी और एजेंसी कानून के अनुसार स्वतंत्र रूप से जांच जारी रख सकेगी। आॅब्जर्वर सिर्फ अभ्यर्थियों की उत्पीड़न संबंधित शिकायतों को देखेंगे। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि मानिटर की नियुक्ति का उद्देश्य केवल निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच सुनिश्चित करना है। इसे एसआईटी की जांच में हस्तक्षेप या जांच पर किसी प्रतिकूल टिप्पणी के रूप में नहीं देखा जाएगा। हाई कोर्ट ने कहा कि वह चल रही जांच पर कोई टिप्पणी नहीं कर रहा है।
अभ्यर्थियों ने की थी समन कर परेशान करने की शिकायत : दरअसल, सुनवाई के दौरान कुछ याचिकाकतार्ओं की ओर से अधिवक्ता इंद्रजीत सिन्हा और अमृतांश वत्स ने कहा कि जांच कर रही एसआईटी कुछ निर्दोष अभ्यर्थियों को भी नोटिस या समन जारी कर रही है और उन पर दबाव बनाए जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं। इसकी निगरानी की जानी चाहिए, ताकि किसी को बेवजह परेशान नहीं किया जाए। राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि जांच के दौरान सामग्री के आधार पर किसी भी व्यक्ति को कानून के अनुसार नोटिस या समन किया जा सकता है। हालांकि, यदि किसी को जांच में मनमाने रवैये या उत्पीड़न की आशंका है, तो स्वतंत्र व्यवस्था के जरिए इसकी निगरानी की जा सकती है।
अदालत ने कहा कि किसी व्यक्ति को समन किया जाना अपने आप में उत्पीड़न नहीं माना जा सकता, लेकिन न्याय और निष्पक्षता के हित में यह जरूरी है कि वास्तविक अभ्यर्थियों के मन में किसी तरह की आशंका न रहे। इसी उद्देश्य से जस्टिस गौतम कुमार चौधरी को एसआईटी की जांच में उत्पीड़न संबंधी शिकायतों की निगरानी की जिम्मेदारी दी गई है।
समन मिलने पर जांच में सहयोग करना होगा : हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि किसी नियुक्त अभ्यर्थी को एसआईटी का समन मिलता है तो उसे जांच में पूरा सहयोग करना होगा। यदि उसे लगता है कि उसके साथ उत्पीड़न हुआ है, तो वह मॉनिटर जस्टिस गौतम कुमार चौधरी के समक्ष शिकायत कर सकता है। शिकायत सही पाए जाने पर इसकी जानकारी एसआईटी प्रमुख को दी जाएगी और आवश्यक सुधारात्मक कार्रवाई की जाएगी। अदालत ने इसके लिए नोडल पदाधिकारी के रूप में सेवानिवृत्त डीजी आरके मल्लिक को जिम्मेदारी दी गई है।
कोर्ट ने कहा- हाथी चले बाजार, कुत्ते भौंके हजार : सुनवाई के दौरान प्रार्थियों की ओर से कहा गया कि मामले की हाई कोर्ट की सुनवाई का लाइव स्ट्रीम किया जा रहा है। इसकी क्लिप को सोशल मीडिया पर प्रसारित करते हुए अदालत पर आरोप लगो जा रहे हैं, जबकि सुप्रीम कोर्ट ने ऐसा करने से सख्त मना किया है। इस पर अदालत ने दोनों पक्षों को संयम बरतने और इस ओर ध्यान नहीं देने का निर्देश देते हुए कहा कि हाथी चले बाजार, कुत्ते भौंके हजार।

