
रांची। झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित धांधली की जांच का दायरा लगातार बढ़ रहा है। मुख्य आरोपी अभय तिवारी से पूछताछ और जांच में सामने आई जानकारी के आधार पर सीआईडी-एसआईटी अब तक 100 से अधिक अभ्यर्थियों से पूछताछ कर चुकी है। मंगलवार को भी करीब 20 अभ्यर्थियों को पूछताछ के लिए नोटिस जारी किया गया।
जांच एजेंसी इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों, आरोपियों के बयानों और अन्य दस्तावेजों के आधार पर संदिग्ध अभ्यर्थियों, बिचौलियों तथा परीक्षा केंद्रों से जुड़े लोगों की भूमिका की पड़ताल कर रही है। जांच का फोकस पिछले वर्षों में आयोजित विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और इसमें शामिल नेटवर्क का पता लगाने पर है।
आउटसोर्सिंग एजेंसी से रहा है अभय तिवारी का संबंध
मुख्य आरोपी अभय तिवारी पूर्व में गोड्डा जिले के पोड़ैयाहाट में ब्लॉक सप्लाई ऑफिसर के पद पर तैनात था। सरकारी सेवा में आने से पहले वह परीक्षा आयोजन से जुड़ी आउटसोर्सिंग एजेंसी टीडीपीएल में मार्केटिंग मैनेजर के तौर पर काम कर चुका था। जांच एजेंसी उसके पूर्व संपर्कों और विभिन्न परीक्षाओं में उसकी कथित भूमिका की भी पड़ताल कर रही है।
पूछताछ में अभय तिवारी ने कथित तौर पर प्रतियोगी परीक्षाओं में चयन के लिए होने वाले आर्थिक लेनदेन को लेकर कई अहम जानकारी दी है। उसके कथित बयानों के अनुसार, सिविल सेवा परीक्षा में प्रारंभिक परीक्षा पास कराने के लिए करीब पांच लाख रुपये, मुख्य परीक्षा के लिए 10 लाख रुपये और अंतिम चयन के लिए 40 से 60 लाख रुपये तक की रकम लिए जाने का दावा किया गया है।
इसी तरह फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर के लिए 20 से 25 लाख रुपये और असिस्टेंट कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट के लिए 30 से 35 लाख रुपये तक की कथित डील का जिक्र जांच में सामने आया है। हालांकि, इन दावों की जांच एजेंसी स्वतंत्र रूप से पुष्टि कर रही है।
पीजीटी परीक्षा में तकनीकी मदद की भी जांच
जांच के दौरान पीजीटी शिक्षक भर्ती परीक्षा में कथित तौर पर सॉफ्टवेयर और रिमोट एक्सेस के जरिए अभ्यर्थियों को मदद पहुंचाने की बात भी सामने आई है। सीआईडी-एसआईटी इस तकनीकी नेटवर्क, इस्तेमाल किए गए उपकरणों और इसमें शामिल लोगों की भूमिका की जांच कर रही है।
मामले में अभय तिवारी के भाई अक्षय तिवारी और पत्नी सुषमा कुमारी की गिरफ्तारी हो चुकी है। दोनों से पूछताछ के दौरान कथित आर्थिक लेनदेन और परीक्षा धांधली से जुड़े संपर्कों के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है।
पूर्व अधिकारियों की भूमिका भी जांच के घेरे में
जांच एजेंसी पूर्व जेपीएससी अध्यक्ष एल. ख्यांगते समेत आयोग से जुड़े अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच कर रही है। पूछताछ के दौरान अभय तिवारी ने टीडीपीएल को ठेका दिलाने के एवज में तत्कालीन जेपीएससी अध्यक्ष को कथित तौर पर दो करोड़ रुपये दिए जाने का दावा किया है। जांच एजेंसी इस दावे से जुड़े साक्ष्यों और आर्थिक लेनदेन की भी पड़ताल कर रही है।
जेपीएससी के पूर्व सदस्यों और जेएसएससी के सचिव सुधीर कुमार गुप्ता से भी पूछताछ की जा चुकी है। सीआईडी अब आरोपियों के बयानों, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों और वित्तीय लेनदेन को आपस में जोड़कर पूरे नेटवर्क की कड़ियां तलाश रही है।
वहीं, विपक्षी दलों और छात्र संगठनों ने मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से कराने की मांग दोहराई है।
