
रांची। झारखंड में लोकायुक्त, मानवाधिकार आयोग और राज्य सूचना आयोग सहित विभिन्न संवैधानिक संस्थाओं में वर्षों से रिक्त पड़े पदों को लेकर दायर जनहित याचिका पर मंगलवार को झारखंड उच्च न्यायालय में सुनवाई हुई। अदालत ने राज्य सरकार को छह सप्ताह के भीतर लोकायुक्त की नियुक्ति सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।
मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति एम.एस. सोनक एवं न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने राज्य सरकार से यह भी कहा कि मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष, राज्य सूचना आयोग के मुख्य सूचना आयुक्त एवं सूचना आयुक्त समेत अन्य संवैधानिक पदों पर नियुक्ति प्रक्रिया कब तक पूरी की जाएगी, इसका विस्तृत ब्यौरा चार सप्ताह के भीतर शपथ पत्र के माध्यम से प्रस्तुत किया जाए। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 17 मार्च की तिथि निर्धारित कर दी है।
सुनवाई के दौरान प्रार्थियों की ओर से वरीय अधिवक्ता वीपी सिंह एवं राजीव शर्मा ने अदालत के समक्ष दलीलें पेश कीं। अधिवक्ता वीपी सिंह ने कहा कि राज्य सरकार इन महत्वपूर्ण संवैधानिक पदों पर नियुक्ति को लेकर लगातार टालमटोल का रवैया अपना रही है। उन्होंने बताया कि पिछले चार वर्षों से सरकार केवल समय मांग रही है, लेकिन अब तक लोकायुक्त सहित कई अहम संस्थानों में नियुक्तियां नहीं की गई हैं।
उन्होंने कहा कि लोकायुक्त, मानवाधिकार आयोग और राज्य सूचना आयोग जैसी संस्थाओं में तीन से पांच वर्षों से पद रिक्त पड़े हैं, जिससे प्रशासनिक जवाबदेही, पारदर्शिता और आम नागरिकों के अधिकारों की रक्षा की व्यवस्था प्रभावित हो रही है।
वहीं, राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता राजीव रंजन ने अदालत को बताया कि सरकार इस दिशा में कार्य कर रही है और छह सप्ताह के भीतर लोकायुक्त की नियुक्ति कर ली जाएगी। उन्होंने कहा कि अन्य संवैधानिक पदों पर नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर भी सरकार आवश्यक कदम उठा रही है।

