मुंबई। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने गुरुवार को कहा कि हालिया छात्र आंदोलनों और जेन जी को लेकर कहा कि यदि जेन जी विरोध-प्रदर्शन कर रही है तो उन्हें देशविरोधी नहीं कहा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह देश की अपनी नई पीढ़ी है और उनके मुद्दों को संवाद के जरिए समझकर समाधान निकालने की जरूरत है।एक छात्र संवाद कार्यक्रम में भागवत ने कहा कि अगर जेन जी प्रदर्शन कर रही है तो इसका मतलब यह नहीं कि वे एंटी-नेशनल हैं। वे हमारे अपने लोग हैं, हमारी अगली पीढ़ी हैं। मेरा मानना है कि जेन जी और जेन अल्फा मौजूदा पीढ़ी की तुलना में अधिक ईमानदार हैं। उनके साथ देशभक्ति और सेवा की ईमानदार अपील प्रभावी होती है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विरोध-प्रदर्शन भी सहमति बनाने का एक माध्यम है। विभिन्न विचारों के बीच संवाद से ही व्यापक सहमति बनती है। यदि किसी कारण से लोगों की बात नहीं सुनी जाती, तब आंदोलन का रास्ता अपनाया जा सकता है, लेकिन उसका उद्देश्य समाज में विभाजन पैदा करना नहीं, बल्कि व्यवस्था में सुधार होना चाहिए।भागवत ने कहा कि हाल की घटनाओं में छात्रों की शिकायतें वास्तविक हैं और भारत की शिक्षा व्यवस्था में अभी बहुत कुछ किए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि इसलिए इन मुद्दों पर गंभीर संवाद होना चाहिए। उन्होंने कहा, जब हम उनकी उम्र के थे, तब बड़ों की हर बात बिना सवाल किए मान लेते थे। लेकिन आज की जेन जी और जेन अल्फा सवाल पूछती है, तार्किक जवाब चाहती है और अपनापन भी चाहती है। लोकतंत्र में यही सही तरीका है। अंग्रेजी में इसे ‘डिबेट’ कहा जाता है, जबकि हमारी परंपरा में इसे ‘शास्त्रार्थ’ कहा गया है, जहां विभिन्न दृष्टिकोणों से सत्य का व्यापक स्वरूप सामने आता है।उन्होंने कहा कि वह यह नहीं कहेंगे कि जेन जी को आंदोलन नहीं करना चाहिए, लेकिन लोकतंत्र में विरोध करने के भी तरीके हैं। इस संदर्भ में उन्होंने डॉ. भीमराव आंबेडकर के संविधान सभा में दिए गए भाषणों और संविधान की भावना को समझने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि यह भी समझना चाहिए कि युवा किसी व्यक्ति के विरोध में नहीं, बल्कि व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर आवाज उठा रहे हैं। छात्रों पर कथित पैलेट गन फायरिंग के सवाल पर भागवत ने कहा कि इस घटना की पूरी जानकारी उनके पास नहीं है।उन्होंने कहा कि उन्होंने भी इस संबंध में मीडिया में खबर पढ़ी है, इसलिए बिना पूरी जानकारी के टिप्पणी करना उचित नहीं होगा। हालांकि उन्होंने कहा कि यदि आंख मूंदकर किसी पर विश्वास करने की बात होगी तो वह जेन जी पर विश्वास करेंगे। शिक्षा व्यवस्था पर बोलते हुए भागवत ने कहा कि शिक्षा सभी के लिए सुलभ होनी चाहिए और उसकी उचित व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि सबसे पहले शिक्षकों को बेहतर प्रशिक्षण देने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा, शिक्षा हमारे बच्चों और अगली पीढ़ी के निर्माण के लिए है, पैसा कमाने का माध्यम नहीं।उन्होंने शिक्षकों के लगभग 10 लाख रिक्त पदों का उल्लेख करते हुए शिक्षा पर सकल बजट का 6 प्रतिशत खर्च किए जाने की लंबे समय से चली आ रही मांग का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि यह मांग उचित है और बिना आंदोलन के भी इसे हासिल किया जा सकता है।

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