अहमदाबाद। अहमदाबाद एयरपोर्ट से गुरुवार की दोपहर उड़ान भरते ही एक भयावह दृश्य ने पूरे शहर को दहला दिया। एयर इंडिया की फ्लाइट AI-177, जो 242 लोगों को लेकर लंदन के गैटविक एयरपोर्ट जा रही थी, उड़ान भरने के कुछ ही पलों बाद दुर्घटनाग्रस्त हो गई। आसमान में उड़ी चिंगारियां और ज़मीन पर गिरी त्रासदी के इस दृश्य में जब सब कुछ राख में तब्दील हो रहा था, उसी मलबे से एक कराहती आवाज़ निकली—और चमत्कार हुआ।

11A की सीट और एक नई ज़िंदगी : अहमदाबाद के पुलिस कमिश्नर जी.एस. मलिक ने घटना के कुछ घंटे बाद बताया, “सीट 11A पर एक यात्री जीवित मिला है। उसका इलाज असरवा सिविल अस्पताल में चल रहा है। मरने वालों की संख्या अभी निश्चित नहीं, क्योंकि विमान एक घनी आबादी वाले इलाके में गिरा।”इस जीवित बचे शख्स का नाम है रमेश विश्वाश कुमार—एक 40 वर्षीय ब्रिटिश नागरिक, जो पिछले दो दशकों से लंदन में रह रहे थे। रमेश अपने भाई अजय कुमार रमेश के साथ भारत यात्रा पर आए थे और अब यूके लौट रहे थे।

तीस सेकंड, और फिर मौत का सन्नाटा : रमेश ने अस्पताल के बेड से एएनआई को बताया, “उड़ान भरने के लगभग तीस सेकंड बाद एक जोरदार आवाज़ हुई। मुझे याद है कि मेरे सामने की सीटें हिल गईं। अचानक ज़ोर की झटका लगा और सब कुछ अंधेरे में चला गया।”होश में आने पर जो दृश्य उन्होंने देखा, वह किसी दुःस्वप्न से कम नहीं था। “जब मैं उठा, मेरे चारों ओर लाशें थीं। कुछ लोगों के शरीर झुलसे हुए थे। प्लेन के टुकड़े बिखरे पड़े थे। मुझे लगा मैं मर चुका हूं… पर किसी ने मेरी बाँह पकड़ी और मुझे खींच लिया।”

बोर्डिंग पास—एक पहचान, एक सबूत : रमेश के पास अभी भी उनका बोर्डिंग पास सुरक्षित है, जो इस बात का सबूत है कि वे उसी फ्लाइट में थे। उन्होंने बताया कि उनके भाई अजय कुमार उनसे अलग पंक्ति में बैठे थे, और अब वे उनका कोई पता नहीं लगा पा रहे हैं। उनकी आवाज़ में गहरी चिंता और भावनाओं का तूफान था: “हम दिव से लौट रहे थे। अजय मेरे साथ यात्रा कर रहे थे। अब मैं उन्हें ढूंढ नहीं पा रहा हूं। कृपया मेरी मदद कीजिए।”

मलबे से उठती चीखें, परिवारों की तलाश : विमान जिस क्षेत्र में गिरा, वह एक आवासीय इलाका है। मौके पर दमकल की दर्जनों गाड़ियां, एनडीआरएफ और पुलिस की टीमें तैनात रहीं।हादसे के बाद अस्पताल में एक और युद्ध छिड़ा हुआ है—पहचान का युद्ध। दुर्घटना स्थल से दर्जनों शव निकाले गए हैं, जिनमें कई की पहचान करना मुश्किल है।अस्पताल के गलियारे, चीखते-बिलखते चेहरे, और मोबाइल स्क्रीन पर खोए हुए नाम—यह एक जीवित नरक जैसा दृश्य था।
रमेश की कहानी बन गई उम्मीद की लौ : इस भयानक त्रासदी के बीच रमेश विश्वाश कुमार जैसे जीवित बचे व्यक्ति की कहानी, एक उम्मीद की लौ बनकर सामने आई है। अस्पताल में भर्ती रमेश के सीने, आंखों और पैरों पर गंभीर चोटें हैं, लेकिन उनकी चेतना और याददाश्त दुरुस्त है।उन्होंने बताया, “मुझे नहीं पता कि मैं कैसे बचा। जब मैं उठा, तो लगा जैसे भगवान ने मुझे फिर से जीवन दे दिया हो।”

एयर इंडिया का बयान : एयर इंडिया की ओर से जारी बयान के अनुसार, विमान में 230 यात्रियों के अलावा चालक दल के 12 सदस्य सवार थे। यात्रियों में 169 भारतीय नागरिक, 53 ब्रिटिश, 7 पुर्तगाली और 1 कनाडाई नागरिक शामिल थे।एयरलाइन ने कहा कि वह पूरी स्थिति पर नजर रख रही है और बचाव कार्य में स्थानीय प्रशासन की मदद कर रही है।एविएशन एक्सपर्ट्स का मानना है कि शुरुआती संकेत किसी तकनीकी खराबी की ओर इशारा करते हैं। हालांकि, ब्लैक बॉक्स की रिकवरी के बाद ही पुख्ता जानकारी मिल सकेगी।

मानवता की परीक्षा और पुनर्जन्म का प्रतीक : रमेश की कहानी, न सिर्फ एक चमत्कार है, बल्कि यह आस्था, विज्ञान और मानवीय संघर्ष की भी कहानी है। जब एक विशाल एयरक्राफ्ट आग की लपटों में तब्दील हो चुका हो, ऐसे में एक व्यक्ति का ज़िंदा मिलना—वह भी चेतन अवस्था में—एक पुनर्जन्म से कम नहीं। अंतिम शब्द“जाको राखे साइयां मार सके ना कोय…”रमेश विश्वाश कुमार की कहानी इसी कहावत की जीती-जागती मिसाल है। लेकिन यह कहानी अधूरी है, जब तक उनके भाई का कुछ पता न चले। हादसे के साये में उम्मीद की एक किरण ने ज़रूर जन्म लिया है, लेकिन यह ज़रूरत है कि उस रौशनी में सभी पीड़ित परिवारों को न्याय और राहत मिले।

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