नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इजराइल की संसद ‘नेसेट’ को संबोधित किया। यह पहला अवसर रहा जब किसी भारतीय प्रधानमंत्री ने इजराइल की संसद को संबोधित किया। अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने एकजुटता का सशक्त संदेश दिया और आतंकवाद पर भी प्रहार किया। उन्होंने कहा कि आतंकवाद कहीं भी हो, वह हर जगह शांति के लिए खतरा है। श्री मोदी ने कहा कि भारत भी लंबे समय से आतंकवाद का दर्द झेलता आया है।

प्रधानमंत्री के ऐतिहासिक भाषण के दौरान इजरायली सांसदों ने कई बार जोरदार तालियां बजाकर सराहना की। प्रधानमंत्री ने आतंकवाद से पूरी ताकत के साथ निपटने के भारत के दृढ़ संकल्प को दोहराया। उन्होंने कहा कि इजरायल की तरह, भारत की भी आतंकवाद को बिल्कुल बर्दाश्त ना करने की नीति है, जिसमें किसी तरह का दोहरा मापदंड नहीं है। प्रधानमंत्री ने 7 अक्टूबर, 2023 को हमास द्वारा किए गए बर्बर आतंकवादी हमले में मारे गए लोगों के परिजनों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि वे 1.4 अरब भारतीयों की ओर से शुभकामनाएं और मित्रता, सम्मान और साझेदारी का संदेश लेकर आए हैं। प्रधानमंत्री ने यह भी उल्लेख किया कि यहूदी समुदाय भारत में उत्पीड़न या भेदभाव के भय के बिना निवास करते रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद द्वारा समर्थित गाजा शांति पहल को क्षेत्र में “न्यायपूर्ण और स्थायी शांति” का मार्ग बताया। उन्होंने कहा कि भारत ने इस पहल के लिए अपना दृढ़ समर्थन व्यक्त किया है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों से भारत विश्व की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था रहा है और जल्द ही वैश्विक स्तर पर शीर्ष तीन अर्थव्यवस्थाओं में शामिल होगा। उन्होंने कहा कि इजरायल नवाचार और तकनीकी नेतृत्व का एक शक्तिशाली केंद्र है, जो एक भविष्य उन्मुख साझेदारी की स्वाभाविक आधारशिला तैयार करता है। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि पिछले वर्ष दोनों देशों के बीच हस्ताक्षरित द्विपक्षीय निवेश संधि से कारोबार जगत को भरोसा और स्थिरता मिलेगी।।

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