नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2014 में अपने पहले स्वतंत्रता दिवस संबोधन के दौरान सुरक्षा प्रोटोकॉल में बड़ा बदलाव करवाया था। लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित करते समय उनके सामने लगाया जाने वाला बुलेटप्रूफ ग्लास बैरियर हटा दिया गया था। इस घटना से जुड़ा एक पुराना वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर ‘मोदी स्टोरी’ ने साझा किया है।

वीडियो में भारत सरकार के पूर्व रक्षा सचिव आरके माथुर ने इस घटना का जिक्र किया है। उन्होंने बताया कि 15 अगस्त 2014 को प्रधानमंत्री के संबोधन से पहले वह और तत्कालीन इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) निदेशक पीएम मोदी को सुरक्षा संबंधी ब्रीफिंग देने पहुंचे थे।

आरके माथुर के मुताबिक, अधिकारियों ने प्रधानमंत्री को बताया था कि सुरक्षा कारणों से उनके सामने बुलेटप्रूफ ग्लास लगाया जाता है। उन्होंने बताया कि लाल किले से सामने चांदनी चौक का इलाका और कई ऊंची इमारतें दिखाई देती हैं, जिसके चलते सुरक्षा एजेंसियां अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था के पक्ष में थीं।

माथुर ने बताया कि जब प्रधानमंत्री को इस सुरक्षा व्यवस्था के बारे में जानकारी दी गई, तो उनका स्पष्ट जवाब था कि यदि बुलेटप्रूफ ग्लास हटाकर जनता से सीधे संवाद नहीं किया जा सकता, तो वह संबोधन नहीं करेंगे।

इसके बाद सुरक्षा अधिकारियों ने अपना निर्णय बदलते हुए बुलेटप्रूफ ग्लास हटाने का फैसला किया। माथुर के अनुसार, 14 और 15 अगस्त की दरम्यानी रात में सुरक्षा बैरियर को हटा दिया गया।

इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले की प्राचीर से बिना बुलेटप्रूफ ग्लास के देश को संबोधित किया। ‘मोदी स्टोरी’ ने इस घटना को एक ऐसे नेता के उदाहरण के तौर पर पेश किया है, जिसने सुरक्षा संबंधी चिंताओं के बीच भी जनता से सीधे जुड़ने को प्राथमिकता दी।

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