नई दिल्ली। भारत को ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने और घरेलू स्तर पर तेल व गैस के उत्पादन को गति देने के लिए केंद्र सरकार ने एक बहुत बड़ा नीतिगत फैसला लिया है। सरकार ने कच्चे तेल (Crude Oil), प्राकृतिक गैस (Natural Gas) और केसिंग हेड कंडेनसेट (Casing Head Condensate) के लिए रॉयल्टी दरों और उनकी गणना से जुड़ी कार्यप्रणालियों को पूरी तरह युक्तिसंगत (Rationalize) बना दिया है। इस कदम से तेल खोज और उत्पादन (Exploration and Production) के क्षेत्र में लंबे समय से चली आ रही विसंगतियां दूर होंगी। इस महत्वपूर्ण नीतिगत सुधार की जानकारी केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने सोशल मीडिया पर साझा की। विनियामक स्पष्टता और निवेशकों का बढ़ेगा भरोसाकेंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने अपने बयान में इस फैसले को ऐतिहासिक बताते हुए ट्वीट किया, “यह ऐतिहासिक फैसला देश में विनियामक स्पष्टता (Regulatory Clarity) की दिशा में एक बहुत बड़ा और निर्णायक कदम साबित होगा। ऑयलफील्ड्स (Regulation and Development) अधिनियम और पेट्रोलियम व प्राकृतिक गैस (PNG) नियमों में वर्ष 2025 में किए गए ऐतिहासिक संशोधनों के बाद, अब सरकार ने कच्चे तेल, प्राकृतिक गैस और केसिंग हेड कंडेनसेट के लिए रॉयल्टी दरों के ढांचे को युक्तिसंगत बनाया है।”उन्होंने आगे कहा कि संशोधित अनुसूची (Revised Schedule) विभिन्न हाइड्रोकार्बन व्यवस्थाओं के बीच लंबे समय से चली आ रही विसंगतियों और विवादों को पूरी तरह समाप्त कर देगी। इसका मुख्य उद्देश्य भारत के अपस्ट्रीम सेक्टर (Upstream Sector) के लिए एक स्थिर, अनुमानित (Predictable) और वैश्विक निवेशकों के अनुकूल व्यापारिक ढांचा तैयार करना है।क्यों महत्वपूर्ण है यह नीतिगत बदलाव?रॉयल्टी दरों में किए गए इस बड़े सुधार से भारत के ऊर्जा परिदृश्य पर दूरगामी प्रभाव पड़ने की उम्मीद है:घरेलू उत्पादन में वृद्धि : रॉयल्टी दरों के तर्कसंगत होने से वैश्विक और घरेलू तेल कंपनियों के लिए भारत में गहरे समुद्र (Deepwater) और दुर्गम क्षेत्रों में तेल व गैस की खोज करना वित्तीय रूप से अधिक आकर्षक हो जाएगा।निवेशक-अनुकूल माहौल : अक्सर पेचीदा टैक्स और रॉयल्टी नियमों के कारण विदेशी कंपनियां भारत के अपस्ट्रीम सेक्टर में निवेश करने से कतराती थीं। नई व्यवस्था से उन्हें एक स्थिर और पारदर्शी नीति मिलेगी।आयात पर निर्भरता होगी कम : भारत वर्तमान में अपनी जरूरत का करीब 85 प्रतिशत कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है। घरेलू स्तर पर उत्पादन बढ़ने से देश के विदेशी मुद्रा भंडार की बचत होगी और देश ऊर्जा सुरक्षा की दिशा में आत्मनिर्भर बनेगा।

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