
रांची। उच्च न्यायालय ने एक हेबियस कॉर्पस (बंदी प्रत्यक्षीकरण) की सुनवाई करते हुए जमशेदपुर के एसएसपी को गुरुवार को वर्चुअल तलब किया। उच्च न्यायालय ने उनसे पूछा कि जब कॉर्पस (पीड़ित युवती) ने अपने भाई की ओर से धमकी दिए जाने से संबंधित शिकायत उनके पास दर्ज कराई तो उन्होंने प्राथमिकी दर्ज क्यों नहीं की। गंभीर शिकायत आने पर प्राथमिकी दर्ज की जा सकती हैै। इस पर एसएसपी ने कहा कि युवती की शिकायत में कही गई बातों का वह अध्ययन कर रहे हैं और उचित निर्णय लेंगे।
उच्च न्यायालय ने मामले में युवती की मां के अधिवक्ता को निर्देश दिया कि वह युवती के भाई से सेटलमेंट के बिंदु पर बातचीत कर अगले सुनवाई में शपथ पत्र दाखिल करें। उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद की अध्यक्षता वाले खंडपीठ ने मामले की सुनवाई की।
प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता खुशबू कुमारी और अधिवक्ता शैलेश कुमार ने पक्ष रखा। अदालत ने मिनिस्ट्री ऑफ एक्सटर्नल अफेयर्स, भारत सरकार के सचिव को भी मामले में प्रतिवादी बनाने का निर्देश दिया था, ताकि युवती के भाई जो ऑस्ट्रेलिया में रहता है, उसके पते के संबंध में जानकारी मिल सके।
उल्लेखनीय है कि पिछले सुनवाई में खंडपीठ ने जमशेदपुर एसएसपी को निर्देश दिया था कि युवती और उसके माता-पिता की सुरक्षा सुनिश्चित करें। उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने स्पष्ट किया था कि यदि उनके साथ कोई अप्रिय घटना होती है तो इसकी व्यक्तिगत जिम्मेदारी एसएसपी की होगी। पूर्व की सुनवाई के दौरान अदालत के आदेश पर युवती और उसकी मां को प्रस्तुत किया गया था।
युवती ने अदालत को बताया था कि वह उच्च शिक्षित है और राष्ट्रीय स्तर की कई प्रतियोगी परीक्षाएं में भी भाग ले चुकी है। उसने कहा कि उसे किसी प्रकार की मानसिक बीमारी या असंतुलन नहीं है, लेकिन उसके भाई ने जबरन उसे कांके स्थित डेविस इंस्टीट्यूट ऑफ साइकियाट्री में भर्ती कराया और बाद में उसे रांची के रिनपास भेज दिया।
युवती ने आरोप लगाया था कि उसके भाई ने संपत्ति के लालच में ऐसा किया और बाद में दादा की संपत्ति को गिफ्ट डीड के जरिए अपने नाम कराकर बेच भी दिया। उसने बताया कि वर्तमान में वह जमशेदपुर के कदमा थाना क्षेत्र में किराये के मकान में अपने बीमार माता-पिता के साथ रह रही है और आर्थिक कठिनाइयों का सामना कर रही है।

