रामगढ़। मां को खोने का गम, परिवार की परंपराओं के निर्वहन की जिम्मेदारी और मुख्यमंत्री के रूप में जनसेवा का दायित्व—झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन इन तीनों जिम्मेदारियों को एक साथ निभा रहे हैं। रामगढ़ जिले के नेमरा स्थित अपने पैतृक गांव में मां रूपी सोरेन के श्राद्धकर्म के बीच मुख्यमंत्री लगातार छठे दिन गांव में घूमकर व्यवस्थाओं का जायजा लेते नजर आए। इस दौरान उन्होंने संबंधित अधिकारियों और लोगों को आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए, ताकि ग्रामीणों और वहां पहुंचने वाले लोगों को किसी तरह की परेशानी न हो।

मां की स्मृति में निभाईं पारंपरिक रस्में
मंगलवार, 13 अक्टूबर को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अपने पैतृक आवास पर दिवंगत मां रूपी सोरेन की स्मृति में दातून, पानी और भोजन परोसने की पारंपरिक रस्म निभाई। परिवार के साथ सामाजिक रीति-रिवाजों का पालन करते हुए उन्होंने अपनी मां को श्रद्धांजलि अर्पित की।

मां के निधन के बाद से मुख्यमंत्री अपने परिवार के साथ नेमरा गांव में हैं। इस दौरान वे एक ओर श्राद्धकर्म से जुड़ी पारंपरिक रस्मों का निर्वहन कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर मुख्यमंत्री के रूप में अपने दायित्वों को भी निभा रहे हैं।

निजी दुख के बीच जनसेवा की जिम्मेदारी
मां के निधन से परिवार शोक में है, लेकिन इस बीच मुख्यमंत्री सरकारी कामकाज पर भी ध्यान दे रहे हैं। नेमरा गांव में व्यवस्थाओं का जायजा लेकर उन्होंने यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया कि श्राद्धकर्म के दौरान पहुंचने वाले लोगों और स्थानीय ग्रामीणों को असुविधा न हो।

मुख्यमंत्री की यह दिनचर्या निजी जीवन की कठिन परिस्थितियों के बीच सार्वजनिक जिम्मेदारियों के निर्वहन को दर्शाती है। पारिवारिक परंपराओं और प्रशासनिक दायित्वों के बीच संतुलन बनाते हुए हेमंत सोरेन नेमरा में लगातार सक्रिय नजर आ रहे हैं।

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