नई दिल्ली । ईरान के पूर्व सुप्रीम नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई को मौत के लगभग 130 दिनों के बाद 4 जुलाई को दफनाया जाएगा। सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार, बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) सैयद अता हसनैन और विदेश राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा खामेनेई के जनाजे और दफनाने की रस्मों में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इन कार्यक्रमों में शामिल होने के लिए आधिकारिक तौर पर आमंत्रित किया था।

ईरान की सरकारी मीडिया के अनुसार, ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अली खामेनेई को दफनाने का कार्यक्रम 4 से लेकर 9 जुलाई तक होगा। आधिकारिक बयान के मुताबिक, खामेनेई और उनके परिवार के सदस्यों के लिए समारोह तेहरान, कोम और मशहद में होंगे। 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल की ओर से किए गए हमले में अयातुल्लाह अली खामेनेई और उनके परिवार के कुछ लोगों की मौत हो गई। ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर की याद में बनी समिति के एक बयान के अनुसार, उनका पार्थिव शरीर 4 और 5 जुलाई, 2026 को तेहरान मोसल्ला में रखा जाएगा। एक समारोह 7 जुलाई, 2026 को कोम में होगा। आखिरकार, अयातुल्लाह अली को 9 जुलाई, 2026 को मशहद में आठवें शिया इमाम की दरगाह में दफनाया जाएगा। इसके बाद ईरान के दूसरे सबसे बड़े शहर में समारोह आयोजित किए जाएंगे।

ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई ने 1989 में अयातुल्लाह रूहोल्लाह खुमैनी की मृत्यु के बाद यह पद संभाला। अयातुल्लाह खुमैनी ने 1979 की इस्लामिक क्रांति का नेतृत्व किया था, जिसके परिणामस्वरूप ईरान में शाह मोहम्मद रजा पहलवी की राजशाही समाप्त हो गई और इस्लामिक गणराज्य की स्थापना हुई। खुमैनी इस क्रांति की वैचारिक और राजनीतिक शक्ति थे, जबकि अली खामेनेई ने सुप्रीम लीडर बनने के बाद ईरान की राजनीतिक व्यवस्था, सेना और रिवोल्यूशनरी गार्ड जैसी संस्थाओं को मजबूत और संगठित किया।

वहीं, अली खामेनेई के पुत्र मोजतबा खामेनेई किसी आधिकारिक राजनीतिक या संवैधानिक पद पर नहीं हैं। हाल ही में मोजतबा खामेनेई को लेकर जो भी सार्वजनिक अनुपस्थिति या राजनीतिक गतिविधियों से जुड़ी अटकलें सामने आई हैं, उनके बारे में कोई आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है।

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