
पटना । बिहार में गंगा और गंडक नदियों के बढ़े जलस्तर के बीच मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने गुरुवार को पटना में गंगा घाट पहुंचकर नदी के जलस्तर का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने अधिकारियों से स्थिति की जानकारी ली और राहत एवं बचाव कार्यों की समीक्षा की। चौधरी ने कहा कि राज्य में बाढ़ की स्थिति अभी चिंता का विषय बनी हुई है और अगले 48 घंटे तक पूरी तरह सतर्क रहने की जरूरत है। बिहार के सात जिलों में बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है। पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सारण, मुजफ्फरपुर, दरभंगा और सुपौल में बड़ी संख्या में लोग बाढ़ से प्रभावित हैं। करीब पौने तीन लाख लोग बाढ़ के बीच घिरे हुए हैं।गंगा का पानी अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है। गंगा और गंडक दोनों नदियों में अब तक का सबसे अधिक जलस्तर देखने को मिला है। सोन नदी में भी पानी उच्चतम स्तर पर पहुंचा है। उन्होंने कहा कि बिहार में इस वर्ष करीब 32 प्रतिशत कम बारिश हुई है, इसके बावजूद नदियों में जलस्तर का इतना बढ़ना चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि हम लोगों ने एयरफोर्स से भी आग्रह किया है कि वे यहां राहत के कार्य के लिए सहयोग करेंगे। इस काम को भी हम लोग आगे बढ़ा रहे हैं। अगले 48 घंटे हम लोगों को पूरी तरह से सतर्क रहना होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी प्रभावित और संवेदनशील क्षेत्रों में जिलाधिकारी से लेकर तमाम अधिकारी लगातार काम कर रहे हैं। सरकार की प्राथमिकता यह है कि किसी भी परिस्थिति में लोगों को राहत उपलब्ध कराई जाए और संवेदनशील क्षेत्रों में प्रशासन पूरी मुस्तैदी से निगरानी रखे। इधर, जल संसाधन विभाग के अनुसार, नेपाल और उत्तर प्रदेश में हुई भारी बारिश के कारण गंडक नदी का जलस्तर डुमरियाघाट (गोपालगंज) में करीब 36 घंटे से तथा रेवाघाट (सारण) और लालगंज (वैशाली) में करीब 21 घंटे से अपने ऐतिहासिक उच्चतम बाढ़ स्तर (एचएफएल) से 22 सेंटीमीटर ऊपर बना हुआ है। इससे गंडक के बाएं और दाएं दोनों तटबंधों पर अत्यधिक दबाव बना हुआ है। विभाग के मुताबिक, गंगा का जलस्तर भी खतरे के निशान से ऊपर है। इसके कारण गंडक में बैकफ्लो का दबाव उत्पन्न हो रहा है, जिससे स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो गई है। कई स्थानों पर सीपेज और पाइपिंग की स्थिति उत्पन्न हुई है। इन स्थानों पर लगातार निगरानी के साथ सुरक्षा और नियंत्रण के लिए सघन बाढ़ संघर्षात्मक कार्य किया जा रहा है। विभाग ने बताया कि सर्वोत्तम प्रयासों के बावजूद सारण जिले के पानापुर प्रखंड में राइट सारण तटबंध में कटाव, ब्रिच हुआ है। वहीं मुजफ्फरपुर जिले के साहेबगंज प्रखंड में तिरहुत मुख्य तटबंध के अंतर्गत एक रिंग बांध में भी ब्रिच हुआ है। हालांकि, विभाग के अनुसार अन्य सभी संवेदनशील स्थल फिलहाल सुरक्षित और नियंत्रण में हैं तथा वहां लगातार बाढ़ संघर्ष कार्य जारी है। वर्तमान में जलस्तर में गिरावट की प्रवृत्ति शुरू हो गई है, लेकिन यह अभी भी पुराने उच्चतम जलस्तर से ऊपर है। विभाग ने अगले 48 घंटे तक हाइड्रोलिक दबाव बने रहने की संभावना जताते हुए लगातार निगरानी जारी रखने की बात कही है। सारण जिले में गंडक नदी के बढ़ते जलस्तर ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। जिले के सात प्रमुख प्रखंडों पानापुर, तरैया, अमनौर, मकेर, दरियापुर सोनपुर एवं परसा के अंतर्गत आने वाली 25 पंचायतों के 102 गांव गंडक के उफान की चपेट में हैं। प्रशासन द्वारा गुरुवार शाम 5:00 बजे तक जारी की गई आंकड़ों के अनुसार इस प्राकृतिक आपदा से क्षेत्र की लगभग 170025 आबादी और करीब 36250 परिवार प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित हुए हैं।मकेर में एनएच 722 पर चढ़ा पानी : सारण जिले के मकेर प्रखंड में बाढ़ के कारण राष्ट्रीय राजमार्ग 722 पर पानी चढ़ जाने से स्थिति गंभीर हो गई है। एनएच पर फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए जिला प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है। जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव और पुलिस अधीक्षक रौशन कुमार ने स्वयं नाव से जलमग्न इलाकों का दौरा किया तथा राहत एवं बचाव अभियान का नेतृत्व किया। बाढ़ प्रभावित पंचायतों से ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है।

