
पटना। तय तो पहले से था, लेकिन सहमति की औपचारिकता मात्र बची थी, जो शनिवार को महागठबंधन की बैठक में पूरी हो गई। पूर्व केंद्रीय मंत्री पशुपति कुमार पारस की राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी (रालोजपा) और झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) भी अब महागठबंधन के घटक बन गए हैं। इन्हें लेकर अब महागठबंधन में आठ दल हो गए हैं। कुनबे का आकार तय हो जाने बाद बैठक में यथाशीघ्र सीटों के बंटवारे पर भी सहमति बनी। राजद के साथ कांग्रेस, विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी), भाकपा, माकपा और भाकपा-माले पहले से ही महागठबंधन में थे। पारस लगभग एक वर्ष से प्रयासरत थे, जबकि झामुमो का उत्साह लगभग दो माह पहले से बढ़ा था। पटना में एक सितंबर को राहुल गांधी के वोटर अधिकार मार्च में सम्मिलित होने झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन भी आए थे। मार्च के बाद वे राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद से मिले। उसी दौरान तय हो गया कि झामुमो भी महागठबंधन के बैनर तले ही चुनाव लड़ेगा, अकेले नहीं।
झामुमो के साथ रालोजपा को राजद अपने हिस्से से सम्मानजनक सीटें देगा। उल्लेखनीय है कि झारखंड में हेमंत के नेतृत्व वाली सरकार में राजद हिस्सेदार है। शनिवार को तेजस्वी यादव के सरकारी आवास पर हुई बैठक में कांग्रेस के बिहार प्रभारी कृष्णा अल्लावारू, प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम के साथ वीआईपी के संस्थापक मुकेश सहनी की उपस्थिति रही।
वाम दलों को इसमें आमंत्रित नहीं किया गया। इसको लेकर राजनीतिक गलियारे में महागठबंधन में अंतर्द्वंद्व की चर्चा होती। हालांकि, वामदलों ने इस कारण भी टीका-टिप्पणी से इनकार कर दिया कि नए साथी राजद के हिस्से और उसकी शर्तों पर हैं। चर्चा है कि झामुमो को चकाई, कटोरिया सहित चार से छह सीटें मिल सकती हैं। हालांकि, उसकी दावेदारी 12 सीटों की है। अलौली सहित रालोजपा को दो-तीन सीटें मिलेंगी। वह आधा दर्जन की अपेक्षा पाले हुए है।
