
रांची। गुइलेन-बैरे सिंड्रोम (जीबीएस) ने रांची में भी दी दस्तक । बीमारी से ग्रसित साढ़े पांच साल की बच्ची को एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। बच्ची को वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया है। बता दें कि कुछ दिन पहले महाराष्ट्र के कुर्ला से रांची लौटी थी। इलाज कर रहे डॉक्टर ने बताया कि इस बीमारी से घबराने की जरुरत नहीं है, लेकिन सावधानी और समय पर इलाज एकमात्र बचाव का जरिया है।
बच्ची का इलाज कर रहे चाइल्ड स्पेशलिस्ट डॉ राजेश ने बताया कि करीब आठ दिन पहले एक दंपत्ति इस बच्ची को लेकर आए थे। तब बच्ची की हालत बेहद गंभीर थी। वह मूव नहीं कर पा रही थी। सांस लेने में भी दिक्कत हो रही थी। लेकिन बच्ची को आईवीआईजी और मिथाइल प्रेडनीसोलोन दवा देकर वेंटिलेटर सपोर्ट दिया गया. फिलहाल बच्ची की हालत स्टेबल है। अब वह आंखें खोल रही है। पहले से बच्ची की हालत ठीक है, लेकिन रिकवर नहीं कर पा रही है।
डॉक्टर राजेश ने बताया कि यह कोई रेयर बीमारी नहीं है। गुइलेन-बैरे सिंड्रोम यानी जीबीएस आॅटोइम्यून न्यूरोलॉजिकल डिसआॅर्डर है। इम्यून सिस्टम अपनी ही बॉडी की नसों पर अटैक करता है। इसकी वजह से मरीज को चलने-फिरने और सांस लेने में परेशानी होती है। इससे बच्चों और बुजुर्गों को खतरा है। उन्होंने कहा कि बच्ची को जब लाया गया था, उसी वक्त लक्षण देखकर बीमारी की गंभीरता का अंदाजा लग गया था. उन्होंने कहा कि उसी वक्त रांची के सिविल सर्जन के अलावा डब्ल्यूएचओ के लखनऊ में मौजूद एक रिप्रेजेंटेटिव को उन्होंने सूचित कर दिया था।
