
पटना। राजद के वरिष्ठ दलित नेता और पूर्व मंत्री शिवचंद्र राम के इस्तीफे के बाद बिहार की राजनीति गरमा गई है। इस पूरे विवाद में केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने राजद पर तीखा हमला बोला है। मांझी ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि शिवचंद्र राम के साथ जो हुआ, वह कोई नई बात नहीं है। उन्होंने लिखा कि उनकी पार्टी और वे खुद इस कठिन समय में शिवचंद्र राम के साथ खड़े हैं। मांझी ने कहा कि ‘जहां मोटा माल मिला, राजद की गाड़ी वहीं रुक जाती है।’ उनका आरोप था कि आर्थिक और राजनीतिक लाभ देखकर ही पार्टी फैसले लेती है, जबकि दलित समाज के नेताओं की उपेक्षा की जाती है।



दलित राजनीति को लेकर साधा निशाना : केंद्रीय मंत्री ने कहा कि अनुसूचित जाति और जनजाति समाज के लोगों के पास इतना संसाधन नहीं होता कि वे कुछ नेताओं को खुश कर सकें। इसी कारण इन वर्गों के नेताओं को अक्सर नजरअंदाज किया जाता है।
जमीन कब्जे के पुराने आरोप भी दोहराए : मांझी ने अपने पुराने आरोपों को दोहराते हुए कहा कि एससी-एसटी समुदाय की पर्चाधारी जमीनों पर सबसे ज्यादा अवैध कब्जा राजद से जुड़े लोगों ने किया है।
उन्होंने कहा कि गरीबों की जमीन तक नहीं छोड़ने वालों से न्याय की उम्मीद करना मुश्किल है। दरअसल, शिवचंद्र राम ने विधान परिषद चुनाव में टिकट नहीं मिलने के बाद राजद के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने दावा किया कि उन्हें MLC बनाने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन अंतिम समय में वादा पूरा नहीं किया गया।
रो पड़े शिवचंद्र राम, सुनाई अपनी पीड़ा : मीडिया से बातचीत के दौरान शिवचंद्र Ram भावुक हो गए और फूट-फूट कर रो पड़े। उन्होंने कहा कि पिछले तीन दिनों से वह सो नहीं पाए हैं और ऐसी स्थिति किसी दुश्मन को भी न मिले।
श्याम रजक ने भी साधा राजद पर निशाना : जदयू के राष्ट्रीय महासचिव श्याम रजक ने भी राजद पर हमला बोलते हुए कहा कि पार्टी में अनुसूचित जाति और जनजाति समाज के लिए सम्मानजनक जगह नहीं है। उन्होंने शिवचंद्र राम से संघर्ष जारी रखने की अपील की। शिवचंद्र राम प्रकरण और उस पर मांझी-श्याम रजक की प्रतिक्रियाओं ने बिहार में दलित राजनीति और राजद की कार्यशैली को लेकर नई बहस छेड़ दी है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि शिवचंद्र राम आगे कौन सा राजनीतिक रास्ता चुनते हैं।

