तेल अवीव/तेहरान।ईरान के खिलाफ इजरायली युद्ध में अमेरिका के शामिल होने की आशंका काफी तेज हो गई है। भूमध्य सागर में अमेरिकी सैन्य गतिविधियां अचानक काफी तेज हो चुकी हैं, जिससे संकेत मिल रहे हैं कि वाशिंगटन, ईरान पर हमलों में इजरायल के साथ कभी भी शामिल हो सकता है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार रात तेहरान के लोगों को फौरन राजधानी छोड़ने की चेतावनी दी थी। ये एक चेतावनी भरा बयान था। जिसके बाद ही संकेत मिलने शुरू हो गये कि अमेरिका अब सीधे तौर पर इजरायल के साथ ईरान के खिलाफ युद्ध में उतर सकता है। जी7 शिखर सम्मेलन से जल्द लौटने वाले ट्रंप ने फिर से साफ किया था कि “ईरान किसी भी हालत में परमाणु हथियार नहीं रख सकता है।” इसके अलावा ट्रंप ने मीडिया से कहा था कि वो किसी ‘सीजफायर’ के मूड में नहीं हैं, बल्कि वो आखिरी फैसला चाहते हैं।

डोनाल्ड ट्रंप की चेतावनी के बाद ईरान की राजधानी तेहरान से भारी संख्या में लोगों का पलायन शुरू हो चुका है। ईरान ने रात में भी इजरायल के खिलाफ बैलिस्टिक मिसाइलों का इस्तेमाल किया है। हालांकि ईरान ने कल देर शाम धमकी दी थी कि ‘आज रात ऐसा हमला किया जाएगा जिसे इजरायल हमेशा याद रखेगा।’ लेकिन ऐसा कुछ देखने को नहीं मिला है। हो सकता है कि ईरान अभी भी भारी तबाही मचाने से बच रहा हो या ये भी हो सकता है कि इजरायली हमलों की वजह से अब उसके पास ऐसी कोई क्षमता बची भी ना हो और उसके पास सिर्फ धमकियां बची हों।

ईरान के खिलाफ युद्ध में शामिल होगा इजरायल?
यूरोन्यूज ने सैन्य सूत्रों के साथ साथ ओपन सोर्स डिफेंस नेटवर्क्स का हवाला देते हुए अपनी रिपोर्ट में बताया है कि रियल-टाइम एविएशन मॉनिटरिंग पोर्टल फ्लाइटराडार 24 से पता चलता है कि भूमध्य सागर में अमेरिकी वायुसेना स्ट्राइक की तैयारी कर रही है। जिससे आशंका बन रही है कि हो सकता है कि बहुत जल्द अमेरिकी वायुसेना भी ईरान के ठिकानों पर बमबारी शुरू कर दे। इजरायल अभी भी ईरान के सबसे महत्वपूर्ण फोर्डो न्यूक्लियर सेंटर को भेदने में नाकाम रहा है। इसके लिए उसे अमेरिकी बी-2 बॉम्बर या फिर बी-52 बॉम्बर चाहिए, जिससे वो GBU-57A/B MOP (Massive Ordnance Penetrator) बम गिरा सके। GBU-57A/B MOP बम में करीब 60 मीटर तक बंकर को उड़ाने की क्षमता है, ऐसे में अगर दो बम गिराए जाते हैं तो फोर्डो न्यूक्लियर स्थल के तबाह होने की संभावना बन सकती है। GBU-57A/B MOP बम, सीधे पहाड़ों में छिपे या कंक्रीट से बने न्यूक्लियर साइट्स को भेद सकते हैं। इजरायल के पास ये बम नहीं है और वो चाहता है कि अमेरिका उसके साथ युद्ध में शामिल होकर फोर्डो न्यूक्लियर साइट पर ये बम गिराए।

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