
नई दिल्ली । तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के बागी सांसद अरूप चक्रवर्ती ने पार्टी नेतृत्व पर गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया कि टीएमसी की सरकार के दौरान सभी का मुंह बंद कराकर रखा गया था। अब सत्ता परिवर्तन के बाद सब सच बोल रहे हैं। उन्होंने पार्टी पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह एक सही राजनीतिक दल की तरह नहीं रही, बल्कि वहां एक बच्चे का खेल चलता था। इस दौरान, अरूप चक्रवर्ती ने एनसीपीआई से विलय पर भी प्रतिक्रिया दी।
टीएमसी के बागी सांसद अरूप चक्रवर्ती ने एनसीपीआई में विलय पर कहा, “इसके पीछे सिर्फ एक ही कारण है। हम दोनों पार्टियां एक साथ आकर एक मजबूत स्थिति में आना चाहती हैं ताकि हम आगे बढ़ सकें। इसलिए हम उस पार्टी को साथ में लेकर आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे हैं।” टीएमसी से दिक्कतों को लेकर उन्होंने कहा, “एक अकेला व्यक्ति (अभिषेक बनर्जी) चलाता था। टीएमसी एक असली राजनीतिक मंच नहीं है। वहां एक बच्चे का खेल चलता था। पार्टी में यह सब नहीं चलना चाहिए। जो करते थे, वे मर्जी से करते थे और जिस पद पर बैठना था, उस पर बैठते थे। क्या आप पार्टी के हेडमास्टर हैं? पार्टी का एक नाम, एक समिति और सदस्य होते हैं। बैठकर बात करते हैं और प्रस्ताव आता है, लेकिन टीएमसी में ऐसा कुछ नहीं था।”
अरूप चक्रवर्ती ने आगे कहा, “भारत की जनता बहुत समझदार है। वे जानते हैं कि आपके साथ कैसा व्यवहार करना है। जब उन्हें आपकी जरूरत होती है, तो वे आपको सही जवाब देते हैं। लेफ्ट फ्रंट को 35-36 साल तक रखा, फिर छोड़ा। इंदिरा गांधी को डेढ़ महीने में प्रधानमंत्री बनाया। ममता बनर्जी को 5 साल में मुख्यमंत्री बनाया। ममता को 15 साल में हटा दिया और भाजपा को 5 साल के अंदर बंगाल में पूरी सत्ता मिल गई।”
बागी सांसद ने कहा, “सिस्टम बहुत अच्छा है। सब कुछ मिलकर किया जाएगा। कोई डर नहीं होगा। कोई दंगे नहीं होंगे। सीएम सुवेंदु अधिकारी बहुत अच्छा रुख अपना रहे हैं और वह टीएमसी सहित सभी राजनीतिक दलों के साथ दोस्ताना रिश्ते बनाकर अपनी सरकार चलाने की कोशिश कर रहे हैं।”
ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के व्यवहार को लेकर बागी सांसद ने कहा, “उन लोगों के लिए बोलना बड़ा मुश्किल है। उन लोगों के घर में मारपीट भी चल जाती है। ममता बनर्जी घर के डर में राजनीति करती हैं।”
चुनावों से पहले चुप्पी पर उन्होंने कहा, “कौन आवाज उठाता और कौन आवाज उठाने देता, क्योंकि सभी का मुंह बंद करके रखा था। कोई भी पुलिस के डर में कुछ नहीं कर पाता था। अब टीएमसी हार चुकी है, इसलिए सभी के मुंह से सच्चाई सामने आ रही है।”
उन्होंने फिर दोहराया कि गंदी राजनीति नहीं चलेगी। आज के दौर में बिल्कुल भी यह चीज नहीं चल सकती है। किसी ने नहीं था कि ममता बनर्जी चुनाव हार जाएंगी।
चुनावों में धांधली के आरोपों पर अरूप चक्रवर्ती ने यह भी कहा कि पश्चिम बंगाल में चुनाव आयोग इस बार काफी एक्टिव था। कैसे वोट चोरी हुई, कहां से हुई, क्या कोई आवाज उठी? टीएमसी हार गई, पार्टी छूट गई और खेला हो गया।
टीएमसी के कांग्रेस में विलय की अटकलों पर उन्होंने कहा, “ममता बनर्जी ने कांग्रेस को तोड़ा था, लेकिन अभी वह जा सकती हैं। वे जो मर्जी कर सकती है, लेकिन उनकी बात कौन सुनेगा। साथ जा रही हैं, जाने दो, मगर इसकी कोई औचित्य नहीं है।”
अरूप चक्रवर्ती ने केंद्र के फैसलों को लेकर भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, “हम सरकार के साथ में रहेंगे। हम देखना चाहते हैं कि जिस तरह विवाद रहा कि राज्य नहीं देता है या केंद्र नहीं देता है, लेकिन अब दोनों मिलकर एक साथ काम करेंगे।”
