नोएडा(उप्र): उप राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने सोमवार को युवाओं से आह्वान किया कि वे आर्थिक राष्ट्रवाद को प्रोत्साहित करें। उन्होंने कहा कि वह सोच रहे थे कि क्या भारत जैसे आकार और क्षमता वाले देश को पतंग, दीये, मोमबत्तियों और फर्नीचर इत्यादि जैसी वस्तुओं का आयात करना चाहिए।

उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने ग्रेटर नोएडा स्थित ‘बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड टेक्नोलॉजी’ (बिमटेक) के 36 वें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए इस बात पर जोर दिया गया कि कोई भी आर्थिक लाभ, चाहे वह कितना भी बड़ा क्यों न हो, आर्थिक राष्ट्रवाद से समझौते को उचित नहीं ठहरा सकता।

धनखड़ ने युवाओं का आह्वान करते हुए कहा कि आर्थिक राष्ट्रवाद को बढ़ावा दें। उन्होंने कहा कि अपरिहार्य आयात के चलते सालाना अरबों डॉलर की विदेशी मुद्रा बर्बाद हो रही है।

उपराष्ट्रपति ने कहा, ‘‘क्या हमारे आकार, क्षमता, प्रतिभा, शिल्प कौशल, उद्यमशीलता वाले देश को पतंग, दीया, मोमबत्ती, फर्नीचर, पर्दे और इसी तरह की अन्य चीजें आयात करनी चाहिए? और जो लोग ऐसा करते हैं उनके लिए एकमात्र आधार कुछ वित्तीय लाभ है। यह वित्तीय लाभ हमारे आर्थिक राष्ट्रवाद की कीमत पर, हमारी अर्थव्यवस्था की कीमत पर है।’’

उपराष्ट्रपति ने कहा कि इसके तीन दुष्परिणाम हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘एक, हम टाले जा सकने वाले आयात कर अपनी बहुमूल्य विदेशी मुद्रा को खत्म कर रहे हैं। मैंने 1990 में संसद सदस्य के रूप में देखा है, हमारी विदेशी मुद्रा लगभग एक अरब अमेरिकी डॉलर से कम हो गई थी। हमारे सोने को भौतिक रूप में दो स्विस बैंकों के पास गिरवी रखना पड़ा।’’

उप राष्ट्रपति ने कहा, ‘‘दो, देश में उपलब्ध वस्तुओं का आयात हमारे लोगों के रोजगार और उद्यमशीलता के विकास की कीमत पर है।’’ उन्होंने कहा कि कोई भी आर्थिक लाभ, चाहे वह कितना भी बड़ा क्यों न हो, आर्थिक राष्ट्रवाद से समझौते को उचित नहीं ठहरा सकता।

धनखड़ ने कहा कि इस भावना को आत्मसात करना होगा। इसे पोषित और विकसित किया जाना चाहिए और दिन-प्रतिदिन हमारे काम में गहराई से शामिल किया जाना चाहिए।

उपराष्ट्रपति ने रेखांकित किया कि कच्चे माल का निर्यात एक और चिंताजनक पहलू है जिसका गंभीर प्रतिकूल आर्थिक प्रभाव पड़ता है।

उन्होंने कहा, ‘‘जब आप मूल्य संवर्धन के बिना कच्चे माल का निर्यात करते हैं, तो एक तरह से घोषणा की जाती है कि हम मूल्य जोड़ने में सक्षम नहीं हैं, जो कि गलत है। हम सक्षम हैं लेकिन हम ऐसा नहीं कर रहे हैं।’’

धनखड़ ने कहा, ‘‘अगर मूल्यवर्धित वस्तुओं का निर्यात हो तो रोजगार पैदा होगा, उद्यमशीलता विकसित होगी, अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी।’’

उन्होंने कहा कि जब हमने जी20 की अध्यक्षता के दौरान ‘एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य’ का आदर्श वाक्य दिया, जो ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ को समाहित करता था, तब भारत ने दुनिया के समक्ष हमारे ज्ञान, शक्ति, हमारी सकारात्मक विचार प्रक्रिया का प्रदर्शन किया।

उप राष्ट्रपति ने छात्रों से आह्वान किया, ‘‘दोस्तों, यह आपका समय है। यह सही समय है। यह अवसरों का लाभ उठाने का समय है। यह आप सभी के लिए 2047 में भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की दौड़ का हिस्सा बनने का समय है।’’

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