
पटना। टेंडर माफिया रिशुश्री की पहुंच यहां तक थी कि वह बड़े अफसरों से सांठगांठ कर नगर आयुक्त तक की कुर्सी मनचाहे अफसरों को दिलाता था। टेंडर घोटाला मामले की जांच कर रही प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के अनुसंधान में इससे जुड़े कई सनसनीखेज तथ्य सामने आए हैं। पिछले वर्ष निगरानी ने वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी मुमुक्षु चौधरी के ठिकानों पर छापा मारा था। उस दौरान ईडी को दिए गए अपने बयान में मुमुक्षु चौधरी ने कई खुलासे किए थे।
ईडी के सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, मुमुक्षु चौधरी ने ईडी को जानकारी दी कि टेंडर माफिया रिशुश्री ने उन्हें नगर निगम सीतामढ़ी के नगर आयुक्त का अतिरिक्त प्रभार दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। इसके लिए रिशुश्री ने कथित तौर पर उच्च अधिकारियों को 25 लाख रुपये का भुगतान किया था। बाद में यह राशि सीतामढ़ी में दिए गए स्वच्छता टेंडर से होने वाले मुनाफे में समायोजित कर ली गई।
बयान के अनुसार, मुमुक्षु ने विभिन्न पदस्थापनाओं के दौरान सीतामढ़ी में करीब चार करोड़ रुपये, सहरसा में पांच करोड़ रुपये तथा मधुबनी में लगभग 34 लाख रुपये के स्वच्छता संबंधी टेंडरों का संचालन किया। इस बयान को जांच एजेंसी के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इसमें कथित पोस्टिंग में खेल, स्वच्छता टेंडरों के आवंटन और प्रभावशाली अधिकारियों से संबंधों को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। ईडी अब इन आरोपों से जुड़े सबूत जुटा रही है इसके साथ ईडी इस बात की भी जांच कर रही है कि जिस प्रकार नगर विकास विभाग के अधिकारियों की पोस्टिंग दिलाई गई वैसे ही खेल अन्य विभागों में तो नहीं चल रहा है।
ईडी सूत्रों के अनुसार, मुमक्षु चौधरी ने वर्ष 1999 में सरकारी सेवा ज्वाइन की थी और ग्रामीण विकास, नगर विकास एवं आवास तथा सामान्य प्रशासन विभाग समेत विभिन्न विभागों में कार्य किया है। अपने सेवा काल में वे डिप्टी कलेक्टर, बीडीओ, कार्यपालक पदाधिकारी, उप नगर आयुक्त, डीआरडीए निदेशक तथा सहरसा नगर निगम के नगर आयुक्त जैसे महत्वपूर्ण पदों पर रह चुके हैं। वे रिशुश्री से 2012 से संपर्क में हैं।

