
नई दिल्ली। शहरों में जिस तरह से आबादी का दबाव लगातार बढ़ रहा है और 2030 तक देश की करीब 45 प्रतिशत आबादी के शहरी होने का अनुमान लगाया जा रहा है, उसके देखते हुए बजट में केंद्र सरकार ने छोटे, मझोले यानी टियर-2 व टियर-3 शहरों के साथ ही धार्मिक शहरों के कायाकल्प और उसे विस्तार देने को लेकर बड़ी पहल की है। जिसमें ऐसे शहरों की संभावनाओं को देखते हुए उन्हें नए शहरी आर्थिक क्षेत्र के रूप में विकसित करने की घोषणा है।
साथ ही इन नए शहरी आर्थिक क्षेत्रों में जरूरी सुविधाओं को जुटाने के लिए अगले पांच सालों में प्रत्येक पर पांच हजार करोड़ रुपए खर्च करने का ऐलान किया है। इस घोषणा के पीछे केंद्र सरकार का फोकस ऐसे शहरों की पहचान कर उन्हें पानी, सीवर, परिवहन जैसी जरूरी सुविधाओं से लैस करना है, जिससे वहां रहने वालों का जीवन आसान बन सके। साथ ही उसके आसपास आर्थिक गतिविधियां भी संचालित की जा सके।
