नई दिल्ली। दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल को कथित शराब नीति संबंधित भ्रष्टाचार के मामले में सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। उनकी याचिका को अदालत ने खारिज कर दिया है। दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि पहले दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले का इंतजार करो।

सुप्रीम कोर्ट में अरविंद केजरीवाल के वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने ट्रायल कोर्ट के फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह फैसला अभूतपूर्व करार था। मनु सिंघवी ने कोर्ट में कहा कि हाईकोर्ट ने पहले स्टे दे दिया और फिर बाद में सुनवाई हुई। सिंघवी की दलील सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आदेश एक या दो दिन में आ जाएगा।


इस पर सिंघवी ने सवाल उठाते बोला कि क्या बेल को सूचीबद्ध करते समय ही स्टे किया जा सकता है। इस पर ईडी की तरफ से पेश हुए एसीजी एसवी राजू ने भी कहा कि फैसला कल तक आ जाएगा। सुप्रीम कोर्ट में सिंघवी ने कहा कि सुबह साढ़े दस बजे दिल्ली हाई कोर्ट ने बिना किसी कारण स्टे लगा दिया और बाद में दलीलें सुनीं गईं।

उन्होंने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही कह चुका है कि जमानत मिल जाने के बाद इसे इतनी आसानी से पलटा नहीं जा सकता है। केजरीवाल के एक अन्य वकील विक्रम चौधरी ने अदालत से कहा कि उनकी कोई आपराधिक पृष्ठभूमि नहीं है और देश छोड़कर भागने का जोखिम भी नहीं है, जबकि इस मामले की जांच 2022 से चल रही है और गिरफ्तारी की वैधता को इस अदालत में चुनौती दी जा चुकी है।

केजरीवाल की जमानत पर अंतरिम स्टे लगाते हुए फैसले को सुरक्षित रखे जाने के हाईकोर्ट के फैसले को लेकर उच्चतम न्यायालय ने बड़ी टिप्पणी करते हुए कहा, स्टे के मामलों में फैसले सुरक्षित नहीं रखे जाते हैं, बल्कि तभी सुना दिया जाता है। यहां जो हुआ है वह अनोखा है। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि वह भी वही गलती नहीं करेगी जो अंतरिम स्टे देते हुए हाई कोर्ट ने की है।

आपको बता दें कि राउज एवेन्यू कोर्ट ने 20 जून को केजरीवाल को राहत देते हुए नियमित जमानत दे दी थी। उस समय पीठ ने कहा था कि ईडी के पास केजरीवाल के खिलाफ कोई सीधे तौर पर सबूत नहीं हैं और फिर अदालत ने केजरीवाल को एक लाख के निजी मुचलके पर जमानत दे दी थी।

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