
नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंगलवार को ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने वहां मौजूद लोगों को संबोधित करते हुए उनका स्वागत किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम में कहा, “आप सभी का भारत में बहुत-बहुत स्वागत है। कुछ देर पहले मिस्टर ब्लूमबर्ग ने यहां अपने विचार रखे। उनका तीस साल का लंबा सफर रहा है और वे मुझसे कह रहे थे कि मैं उनका दोस्त हूं। वे मीडिया के क्षेत्र में एक वरिष्ठ हस्ती, बेहद सफल पेशेवर और एक समर्पित व्यक्ति भी हैं। मैंने भारत के प्रति उनके प्रेम को गहराई से महसूस किया है।” उन्होंने कहा, “हर बार ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम दुनिया के बेहतरीन माइंड्स को एक साथ लाता है। यहां इकोनॉमी पर चर्चा होती है। टेक्नोलॉजी, एनर्जी और ग्लोबल अफेयर्स पर विमर्श होता है। इस बार पहली बार यह आयोजन भारत में हो रहा है। मैं मिस्टर ब्लूमबर्ग और उनकी पूरी टीम को बहुत-बहुत बधाई देता हूं। आपने सही समय पर सही जगह चुनी है।”



पीएम मोदी ने कहा, “इस साल ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम की थीम दुनिया में उभरती नई पावर पर केंद्रित है। हर युग में पावर के अपने स्रोत और अपनी परिभाषा रही है, लेकिन 21वीं सदी में, खासकर इस तीसरे दशक में, बड़ा बदलाव हो रहा है। आज, डेटा ही शक्ति है, ज्ञान ही शक्ति है, इनोवेशन ही शक्ति है। असली सवाल यह नहीं है कि पावर किसके पास है, बल्कि सवाल यह है कि इसका इस्तेमाल कैसे हो रहा है। क्या टेक्नोलॉजी कुछ लोगों को आगे बढ़ाएगी या करोड़ों लोगों के लिए नए अवसर बनाएगी? क्या नॉलेज केवल कुछ लोगों की ताकत बनी रहेगी या सबकी क्षमता बढ़ाएगी? यहीं से एक नया विचार जन्म लेता है और यह विचार है- पावर टू एंपावर। “
प्रधानमंत्री ने कहा, “पावर टू एंपावर करने वाला यह जो मानवीय भाव है, यह सिर्फ दूसरों को उपदेश देने के लिए नहीं है। यह हजारों वर्षों की परंपरा ने हमें सिखाया है। भारत में हमने इसे अपनी गवर्नेंस में, अपनी कार्य संस्कृति में लागू करके दिखाया है।” उन्होंने कहा कि दोस्तों, यह विचार भारत के लिए नया नहीं है। हमारी एक कहावत है कि “विद्या विवादाय, धनं मदाय, शक्तिः परेषां परिपीडनाय खलस्य। साधोर्विपरीतमेतत् ज्ञानाय, दानाय च रक्षणाय॥” इसका सार यह है कि ज्ञान, धन और शक्ति, चाहे ये किसी के भी पास हों, इस आधार पर आंका जाना चाहिए कि वे इनका इस्तेमाल कैसे करते हैं।

