वाशिंगटन/नई दिल्ली। भारत के ऐतिहासिक लूनर मिशन ‘चंद्रयान-3’ की सफलता की गूंज पूरी दुनिया में लगातार बनी हुई है। इसी कड़ी में अंतरिक्ष क्षेत्र के एक बेहद प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय सम्मान ने भारत का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है। अमेरिकन इंस्टीट्यूट ऑफ एरोनॉटिक्स एंड एस्ट्रोनॉटिक्स (AIAA) ने भारत के चंद्रयान-3 मिशन को साल 2026 के प्रतिष्ठित ‘गोडार्ड एस्ट्रोनॉटिक्स अवॉर्ड’ (Goddard Astronautics Award) से सम्मानित किया है। वाशिंगटन डी.सी. (Washington, D.C.) में 21 मई को आयोजित एक भव्य समारोह में भारत को अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में दिए गए इस सर्वोच्च योगदान के लिए यह पुरस्कार दिया गया।
अमेरिका में भारत के राजदूत विनय क्वात्रा ने ग्रहण किया सम्मान
इस गौरवशाली पल के दौरान, अमेरिका में भारत के नवनियुक्त एम्बेसडर (राजदूत) विनय क्वात्रा ने ‘AIAA ASCEND 2026’ कॉन्फ्रेंस में इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइज़ेशन (ISRO) की तरफ से इस प्रतिष्ठित अवॉर्ड को स्वीकार किया। यह सम्मान इस बात का गवाह है कि चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव (South Pole) पर कदम रखने वाले पहले देश के रूप में भारत की तकनीकी क्षमता का लोहा पूरी दुनिया मान रही है।


पुरस्कार ग्रहण करने की तस्वीरें अमेरिका में भारतीय दूतावास के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल (X) पर साझा की गई हैं। रक्षा और अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में भारत की इस उपलब्धि को ‘मेक इन इंडिया’ और वैश्विक अंतरिक्ष विज्ञान के लिए एक बड़ी जीत माना जा रहा है। इस सम्मान से न केवल इसरो के वैज्ञानिकों का उत्साह बढ़ेगा, बल्कि भविष्य के ‘गगनयान’ और अन्य बड़े मिशनों के लिए भारत की अंतरराष्ट्रीय साख और मजबूत होगी।

क्या है ‘गोडार्ड एस्ट्रोनॉटिक्स अवॉर्ड’?
यह पुरस्कार अमेरिकन इंस्टीट्यूट ऑफ एरोनॉटिक्स एंड एस्ट्रोनॉटिक्स (AIAA) द्वारा अंतरिक्ष विज्ञान, इंजीनियरिंग और एस्ट्रोनॉटिक्स के क्षेत्र में उल्लेखनीय व युगांतरकारी उपलब्धियां हासिल करने वाले मिशन या वैज्ञानिकों को दिया जाता है। चंद्रयान-3 की किफायती तकनीक और उसकी अभूतपूर्व सफलता ने इस बार भारत को इस रेस में सबसे आगे रखा।

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