
नयी दिल्ली। केंद्रीय कैबिनेट ने 30 अप्रैल को जाति जनगणना को मंजूरी दी थी। देश में आजादी के बाद यह पहली बार होगा, जब जाति जनगणना कराई जाएगी। इस बीच देश में जातिगत जनगणना के बारे में एक अहम अपडेट सामने आया है। देश में 17 साल बाद फिर राष्ट्रीय जनगणना होगी। गृह मंत्रालय ने कहा कि जनगणना दो चरणों में कराई जाएगी। जातिगत जनगणना के साथ ही देश की जनसंख्या की गिनती भी की जाएगी। इसका पहला चरण एक अक्टूबर 2026 से शुरू होगा। वहीं दूसरा चरण 1 मार्च 2027 से शुरू होगा। पहले चरण में जातिगत जनगणना चार राज्यों में होगी। इन राज्यों मेंउत्तराखंड, हिमाचल, लद्दाख और जम्मू कश्मीर शामिल हैं।
बता दें कि आजादी के बाद भारत में पहली बार जातियों की जनगणना की जाएगी। जातियों की गणना जनगणना के साथ ही होगी। पिछले महीने मोदी सरकार ने जातिगत जनगणना को मंजूरी दी थी। साल 1931 के बाद अब तक भारत में कोई जातिवार जनगणना नहीं हुई है। वहीं देश में हर 10 साल पर जनगणना कराई जाती है। पिछली जनगणना 2011 में हुई थी। नियम के मुताबिक, जनगणना 2021 में होनी थी, लेकिन कोविड की वजह से ऐसा नहीं हो सका था।
जातिगत जनगणना में देश की कई जातियों की गिनती भी की जाएगी। उनके साथ-साथ उनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति—जैसे आय, शिक्षा, रोजगार और रहन-सहन के हालात—का डेटा एकत्र किया जाएगा। सामान्य जनगणना में सिर्फ अनुसूचित जातियों , अनुसूचित जनजातियो और धार्मिक समुदायों की गिनती होती है, जबकि जातिगत जनगणना में अन्य पिछड़ा वर्ग (डइउ) और अन्य सभी जातियों को भी शामिल किया जाता है। इसका मकसद यह समझना होता है कि अलग-अलग जातियों की आबादी कितनी है और उनकी सामाजिक-आर्थिक हालत क्या है ताकि सरकारी योजनाएं और आरक्षण व्यवस्था ज्यादा प्रभावी ढंग से लागू हो सके।
लंबे समय से की जा रही थी इसकी मांग : देश में लंबे समय से जातीय जनगणना की मांग की जा रही थी। जिस पर फाइनल मुहर लगने के बाद अब इसकी तारीख भी सामने आ गई है। आजादी के बाद 1951 से 2011 तक सात बार और भारत में कुल 15 बार जनगणना हो चुकी है। जनगणना में अल्पसंख्यक, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की गणना की जाती है, लेकिन अन्य दूसरी जातियों की गिनती नहीं होती है।
