रांची। राज्यसभा चुनाव को लेकर भाजपा की ओर से राज्यसभा चुनाव में उम्मीदवार उतारने के बाद कई संभावित उम्मीदवारों की चर्चा शुरू हो गई। लेकिन जिन नामों की चर्चा हो रही है, उन नामों में सबसे तेजी से पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा और भारतीय राजस्व सेवा (आईआरएस) की अधिकारी निशा उरांव का नाम सामने आया है। कांग्रेस के कद्दावर नेता और विधायक रामेश्वर उरांव की बेटी निशा उरांव का नाम तीन संकेत के कारण तेजी से उभरा है।

आईआरएस अधिकारी निशा उरांव इन दिनों धर्मांतरण के मुद्दे को लेकर काफी मुखर होकर आवाज उठा रही हैं। पेसा कानून लागू होने पर पहले निशा उरांव की ओर से हेमंत सोरेन के कार्यों की सराहना की गई, लेकिन जब नियमावली का ऐलान हुआ तो निशा उरांव ने इस पर कई आपत्ति जताते हुए आदिवासी संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ मिलकर राज्यपाल को ज्ञापन भी सौंपा। इस बीज राज्य के कई जिलों का भ्रमण कर आदिवासियों के धर्मांतरण पर रोक लगाने को लेकर जागरूकता अभियान चलाया। बीजेपी की नीतियों के अनुरूप ही निशा उरांव ने धर्मांतरण को अपनी संस्कृति और परंपरा की जड़ में नमक डालने की तरह बताया। इतना ही नहीं जब भाजपा नेता बाबूलाल मरांडी ने आदिवासियों से धर्मांतरण के मुद्दे पर अपनी बात रखी तो निशा उरांव ने उनका समर्थन किया।

निशा उरांव का कहना है कि अनुसूचित जनजाति के लिए सरकारी नौकरियों में आरक्षण का प्रावधान किया गया है, लेकिन नौकरी में 90 प्रतिशत आरक्षण धर्म बदलने वाले आदिवासियों को मिल रहा है। इसलिए उन्होंने क्रीमी लेयर की मांग का समर्थन किया। निशा उरांव ने भाजपा की नीतियों के अनुरूप डिलिस्टिंग का समर्थन किया है, यानी जो सरना आदिवासी धर्म बदल कर ईसाई या मुस्लिम धर्म अपना चुके हैं, उनका आदिवासियों का दर्जा समाप्त किया जाए।

नई दिल्ली में हाल ही में जनजातीय समागम का आयोजन किया गया। इस सम्मेलन में निशा उरांव की ओर से बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया गया। सम्मेलन के बाद निशा उरांव की ओर के बीजेपी के उन नीतियों का समर्थन किया, जो सरना आदिवासियों को हिन्दू और सनातन से जुड़ा मानती है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आईआरएस अधिकारी रहने के बावजूद जिस तरह से निशा उरांव धर्मांतरण, डिलिस्टिंग और आदिवासी परंपरा की बात कर रही हैं, वो आने वाले समय में किसी बड़े फैसले का संकेत हैं।

राज्यसभा चुनाव में आंकड़े के अनुसार भाजपा के सिर्फ 21 विधायक है, इसके अलावा एनडीए में शामिल तीन विधायकों का समर्थन मिल सकता है। इसके बावजूद प्रथम वरीयता का 28 वोट जुगाड़ करने के लिए भाजपा के सत्ता पक्ष के तीन-चार विधायकों का समर्थन हासिल करना होगा। ऐसी स्थिति में कांग्रेस विधायक रामेश्वर उरांव की बेटी को भाजपा उम्मीदवार बना कर बड़ा दांव खेल सकती हैं।

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