
पटना। बिहार विधान परिषद की आठ सीटों के चुनाव परिणामों में कई चौंकाने वाले नतीजे सामने आए हैं। पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के प्रत्याशी नीरज कुमार ने जीत दर्ज की। उन्होंने राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के प्रत्याशी दिलीप कुमार को पराजित किया, जबकि जन सुराज के उम्मीदवार अनुज कुमार तीसरे स्थान पर रहे। वहीं, शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के नतीजों में भी कई सीटों पर राजनीतिक समीकरण बदलते नजर आए।
अनंत सिंह बोले- जनता का फैसला सर्वोपरि
चुनाव परिणामों के बाद विधायक अनंत सिंह का बयान चर्चा में आ गया। उन्होंने हार स्वीकार करते हुए कहा कि जनता का फैसला सर्वोपरि है। जिसे जनता का समर्थन मिला, वही जीता और जिसे वोट नहीं मिले, उसे हार का सामना करना पड़ा।
अनंत सिंह ने कहा कि वोट किसी दुकान से खरीदकर नहीं लाए जा सकते। जनता ही सर्वोपरि है और जनता का निर्णय स्वीकार करना चाहिए। उन्होंने पार्टी से नाराजगी की अटकलों को भी खारिज करते हुए कहा कि वह कभी पार्टी से नाराज नहीं रहे हैं।
पटना शिक्षक सीट पर राजद की जीत
पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से राजद प्रत्याशी डॉ. संजीव कुमार ने भाजपा के वरिष्ठ नेता नवल किशोर यादव को हराकर जीत हासिल की। इस परिणाम को पटना शिक्षक सीट के राजनीतिक समीकरण में बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।
जीत के बाद डॉ. संजीव कुमार ने इसे शिक्षक समाज की जीत बताते हुए कहा कि पिछले 30 वर्षों से शिक्षकों के साथ अन्याय हो रहा था। उन्होंने दावा किया कि उनके खिलाफ पूरी राजनीतिक ताकत लगी थी, इसके बावजूद शिक्षकों के समर्थन से उन्हें सफलता मिली।
उन्होंने चुनाव के दौरान पुलिस-प्रशासन के इस्तेमाल और अधिकारियों के तबादले को लेकर भी आरोप लगाए। संजीव कुमार ने कहा कि वह विधान परिषद में शिक्षकों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाएंगे और सरकार पर उनके समाधान के लिए दबाव बनाएंगे। उन्होंने शिक्षकों से किए गए वादों को पूरा करने का भरोसा भी दिया।
दरभंगा, सारण और तिरहुत में भी बदले समीकरण
दरभंगा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से जन सुराज पार्टी के प्रत्याशी सुरेश राय ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मदन मोहन झा को पराजित किया। वहीं, सारण शिक्षक सीट पर भाजपा के बागी निर्दलीय उम्मीदवार डॉ. राहुल राज ने जीत दर्ज की। तिरहुत शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से भाजपा के नरेंद्र प्रसाद सिंह विजयी रहे।
इन नतीजों ने बिहार विधान परिषद के चुनाव में विभिन्न राजनीतिक दलों के लिए नए संकेत दिए हैं। खासकर शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में प्रमुख नेताओं की हार और निर्दलीय तथा नए राजनीतिक विकल्पों की जीत ने चुनाव को चर्चा का विषय बना दिया है।
आठ सीटों के लिए हुआ था मतदान
बिहार विधान परिषद की आठ सीटों के लिए 23 अक्टूबर को मतदान कराया गया था। इनमें चार स्नातक और चार शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र शामिल थे। चुनाव में कुल 150 उम्मीदवार मैदान में थे, जिनमें 90 स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों और 60 शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के प्रत्याशी शामिल थे।
निर्वाचन आयोग के आंकड़ों के अनुसार, शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में 82.85 प्रतिशत और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में 53.42 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया था। पटना, दरभंगा, तिरहुत और कोसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों के साथ पटना, दरभंगा, तिरहुत और सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में मतदान हुआ था।
चुनाव परिणामों के बाद बिहार की राजनीति में इन सीटों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। विशेष रूप से पटना स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के नतीजों ने कई राजनीतिक दावों और समीकरणों को नई दिशा दी है।

