रांची। झारखंड में नक्सलवाद के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत पुलिस और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) को बड़ी सफलता मिली है। ‘ऑपरेशन नवजीवन’ के अंतर्गत 39 लाख रुपये के इनामी छह शीर्ष माओवादी कमांडरों समेत कुल 16 माओवादियों ने मंगलवार को रांची स्थित पुलिस मुख्यालय में आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया।

आत्मसमर्पण कार्यक्रम के दौरान पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) तदाशा मिश्र, एडीजी मनोज कौशिक, आईजी साकेत सिंह, आईजी पंकज कंबोज, आईजी अभियान नरेंद्र सिंह, आईजी अनूप बिरथरे सहित पुलिस और सीआरपीएफ के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों ने अपने हथियार और भारी मात्रा में गोला-बारूद भी सुरक्षा बलों को सौंप दिया।

आत्मसमर्पण करने वालों में 15 लाख रुपये का इनामी रीजनल कमेटी सदस्य संतोष उर्फ बासुदेव दा उर्फ गांधी उर्फ दिलीप उर्फ संजय महतो, 10 लाख रुपये का इनामी जोनल कमेटी सदस्य चंदन लोहरा, पांच-पांच लाख रुपये के इनामी सब-जोनल कमेटी सदस्य अनिल तुरी उर्फ उज्ज्वल और सुखलाल बिरंजिया उर्फ अकेला तथा दो-दो लाख रुपये के इनामी एरिया कमेटी सदस्य सुदेश होनहागा उर्फ सोनाराम और रिसिव सोय शामिल हैं।

इसके अलावा संतोष मांझी उर्फ जगबंधु, जयकांत मुंडा उर्फ गूंगा उर्फ बंगाली, राजनाथ हांसदा उर्फ गुना हांसदा, एतवारी मांझी उर्फ सोनोत उर्फ संत, देवान मुर्मू उर्फ शनिचरवा, सुमित्रा सुरीन, चंपा मंझियाइन उर्फ गुड़िया, सालमी मुंडा उर्फ पारूल, मुन्नी सुरीन उर्फ मुरीन सुरीन और सीता मुंडा ने भी हथियार छोड़कर मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया। पुलिस के अनुसार, देवान मुर्मू एक करोड़ रुपये के इनामी शीर्ष माओवादी नेता मिसिर बेसरा का मुख्य अंगरक्षक रहा है।

आत्मसमर्पण के दौरान माओवादियों ने छह इंसास राइफल, दो एके-47, एक एचके-33 राइफल, एक यूएस कार्बाइन और एक एम-16 राइफल सहित कुल 11 आधुनिक हथियार, 38 मैगजीन तथा 1,562 जीवित कारतूस सुरक्षा बलों को सौंपे।

पुलिस के अनुसार, आत्मसमर्पण करने वाले इन 16 माओवादियों के खिलाफ झारखंड के विभिन्न जिलों में हत्या, पुलिस और सुरक्षा बलों पर हमला, लेवी वसूली, विस्फोट और अन्य नक्सली गतिविधियों से जुड़े कुल 425 मामले दर्ज हैं। इनमें संतोष उर्फ बासुदेव दा के खिलाफ 128 और चंदन लोहरा के खिलाफ 78 मामले दर्ज हैं।

झारखंड पुलिस का कहना है कि सुरक्षा बलों के लगातार अभियान, बढ़ते दबाव और राज्य सरकार की पुनर्वास नीति के कारण बड़ी संख्या में माओवादी हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौट रहे हैं। आत्मसमर्पण करने वाले सभी माओवादियों को राज्य सरकार की पुनर्वास नीति के तहत आर्थिक सहायता, कौशल विकास, रोजगार और पुनर्वास से जुड़ी अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।

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