नई दिल्ली । तुर्की को लेकर आजकल देश में काफी चर्चा हो रही है। हाल में हुए संघर्ष में तुर्की ने खुलकर पाकिस्तान का साथ दिया था। उसके बाद से ही सोशल मीडिया पर बॉयकॉट तुर्की कैंपेन चल रहा है। तुर्की के साथ व्यापार समेत सभी तरह के संबंधों को खत्म करने की मांग की जा रही है। इस बीच सरकार ने तुर्की से संबंध रखने वाली कंपनी सेलेबी एयरपोर्ट सर्विसेज इंडिया लिमिटेड की सुरक्षा मंजूरी रद्द कर दी थी। यह कंपनी भारत में कई एयरपोर्ट्स पर ग्राउंड हैंडलिंग सर्विस देती है। इनमें दिल्ली, कोचीन, बेंगलुरु, हैदराबाद, चेन्नई और गोवा जैसे बड़े एयरपोर्ट शामिल हैं। कंपनी का दावा है कि उसने भारत में 200 मिलियन डॉलर का निवेश कर रखा है। यह तो शुरुआत है। पाकिस्तान के साथ यारी तुर्की को बहुत भारी पड़ सकती है।

कुछ ट्रैवल वेबसाइट्स ने भारतीयों को तुर्की की यात्रा से बचने की सलाह दी है। इसी तरह कई कारोबारियों ने तुर्की से सेब नहीं खरीदने का फैसला किया है। सोशल मीडिया पर #BoycottTurkey ट्रेंड कर रहा है। गोवा विलास ने तुर्की के नागरिकों को गोवा में ठहरने से सुविधा नहीं देने का फैसला किया है। इसी तरह उदयपुर के मार्बल ट्रेडर्स का कहना है कि उन्होंने तुर्की के साथ बिजनस खत्म कर दिया है। भारत के साथ पंगा लेने से तुर्की को करीब 4.6 अरब डॉलर यानी लगभग 40,000 करोड़ रुपये का झटका लग सकता है।

भारत-तुर्की व्यापार
भारत और तुर्की के बीच व्यापार में पिछले कुछ साल में काफी तेजी आई है। 2022-23 में दोनों देशों के बीच कुल व्यापार 13.8 बिलियन डॉलर को पार कर गया। हालांकि 2023-24 में इसमें कुछ गिरावट आई और यह व्यापार 10.43 बिलियन डॉलर रहा। इसमें से भारत ने तुर्की को 6.65 अरब डॉलर का सामान बेचा और उससे 3.78 अरब डॉलर का सामान खरीदा। भारत तुर्की को खासकर गाड़ियां, केमिकल और इलेक्ट्रॉनिक आइटम्स एक्सपोर्ट करता है और उससे फ्यूल, मशीनरी, सीमेंट और ड्राई फ्रूट्स मंगाता है।

तुर्की की कई कंपनियां भारत में लोकप्रिय हो रही हैं। इनमें Godiva, Ulker और LC Waikiki शामिल हैं। साथ ही तुर्की के स्किनकेयर और पर्सनल केयर ब्रांड भी भारत में जगह बना रहे हैं। लेकिन आने वाले दिनों में भारत और तुर्की के बीच ट्रेड प्रभावित हो सकता है। कैट समेत कई व्यापार संगठनों ने तुर्की से आयात-निर्यात बंद करने की मांग उठाई है। अगर इंपोर्ट और एक्सपोर्ट बंद होता है तो इससे तुर्की को पर्यटन और व्यापार दोनों मोर्चों पर झटका लग सकता है।

अप्रैल 2000 से दिसंबर 2023 तक तुर्की का भारत में कुल FDI 227.5 मिलियन डॉलर रहा। भारतीय कंपनियों ने अगस्त 2000 से मार्च 2024 के बीच तुर्की में लगभग 200 मिलियन डॉलर का निवेश किया। सूत्रों के मुताबिक सरकार देश भर में चल रहे तुर्की के निवेश वाले प्रोजेक्ट्स की समीक्षा करने जा रही है। तुर्की की कंपनियां देश के पांच राज्यों यूपी, दिल्ली, मुंबई, गुजरात और जम्मू-कश्मीर में आईटी, मेट्रो रेल और टनल सहित कई तरह के प्रोजेक्‍ट में काम कर रही हैं।

इनके अलावा तुर्की की कंपनियों ने भारत में कंस्ट्रक्शन और टेक्नोलॉजी जैसे सेक्टरों में निवेश कर रखा है। केंद्र सरकार ने इन कंपनियों के सभी सरकारी और निजी प्रोजेक्ट्स की जानकारी जुटानी शुरू कर दी है। इन कंपनियों की भूमिका और हिस्सेदारी की समीक्षा के बाद जरूरी कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि अगर राष्ट्रीय हित प्रभावित होता है, तो इन कंपनियों को प्रोजेक्ट्स से हटाया भी जा सकता है।

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