रांची। झारखंड में विधानसभा चुनाव से कांग्रेस में होगा सकता है फेरबदल। आलाकमान किसी आदिवासी या ओबीसी के नेता को कमान सौंपने पर विचार कर रही है। ताकि राज्य के बड़े वोट बैंक को साधा जा सके। पार्टी ने ऐसे नेता की तलाश शुरू कर दी है जो सभी गुटों को स्वीकार्य हो।

कांग्रेस सांसद सुखदेव भगत और कालीचरण मुंडा इस दौड़ में सबसे आगे बताए जा रहे हैं। दोनों नेता पहली बार लोकसभा चुनाव जीते हैं और अपने-अपने क्षेत्रों में अच्छी पकड़ रखते हैं। दोनों को आदिवासी मतदाताओं का समर्थन हासिल है। पार्टी के अंदर इनका विरोध भी अपेक्षाकृत कम है। सुखदेव भगत पहले भी प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष रह चुके हैं। उन्हें लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी भी पसंद करते हैं। राहुल गांधी ने संसद में सुखदेव भगत के काम की तारीफ भी की है।

दूसरी ओर, कालीचरण मुंडा को भी कांग्रेस लगातार मौके देती रही है। इस बार उन्हें मिली जीत ने उन्हें पार्टी नेतृत्व की दौड़ में आगे ला दिया है। सुखदेव भगत लोहरदगा से और कालीचरण मुंडा खूंटी से सांसद हैं। 2004 से इन दोनों ही लोकसभा सीटों पर कांग्रेस का कब्जा रहा है। इन दोनों ही लोकसभा क्षेत्रों में 6-6 विधानसभा सीटें आती हैं, जिनमें से 2-2 पर कांग्रेस, 5 पर झामुमो और 3 पर भाजपा का कब्जा है। माना जा रहा है कि इन नेताओं को कमान मिलने से दूसरे आदिवासी बहुल इलाकों में कांग्रेस को फायदा हो सकता है।

जहां तक ओबीसी वर्ग की बात है तो कांग्रेस को अभी तक कोई सर्वमान्य चेहरा नहीं मिल पाया है। मंत्री बन्ना गुप्ता, विधायक प्रदीप यादव, कार्यकारी अध्यक्ष जलेश्वर महतो और पूर्व कार्यकारी अध्यक्ष केशव महतो कमलेश ओबीसी नेता हैं, लेकिन इनमें से किसी को भी अध्यक्ष बनाए जाने पर पार्टी के अंदर विरोध होने की आशंका है।

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