
नई दिल्ली। सेनाध्यक्ष जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने बुधवार को बेंगलुरु में हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) का दौरा किया। उन्होंने लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर ‘प्रचंड’ में उड़ान भरकर इसकी लड़ाकू क्षमता, फुर्ती और मिशन की तैयारी का अनुभव किया। जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने एचएएल के हेलीकॉप्टर हैंगर के दौरे में चल रहे आॅपरेशन्स और क्षमताओं के बारे में जानकारी हासिल की। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने भी फरवरी में जैसलमेर एयरफोर्स स्टेशन से प्रचंड में उड़ान भरी थी।चीन के खतरों को देखते हुए सेना ने असम के मिसामारी में प्रचंड को तैनात किया है। यहां से वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) महज 250 किमी. दूरी पर है। इसी तरह अरुणाचल प्रदेश में चार एलसीएच तैनात किये गए हैं, जो एलएसी के अग्रिम इलाकों को कवर कर रहे हैं। एचएएल से सेना को 05 और वायुसेना को 10 हेलीकॉप्टर मिल चुके हैं, जिनका इस्तेमाल दोनों सेनाएं कर रही हैं। भारतीय सेनाओं की भविष्य की जरूरतों के हिसाब से विशेष तौर पर तैयार किये गए यह हेलीकॉप्टर दुर्गम स्थानों और सघन पर्वतीय क्षेत्रों में भी कारगर हैं। इसे कई तरह के बड़े बम, बंदूकों और मिसाइलों से लैस किया जा सकता है। इसे खासतौर पर ऊंचे पहाड़ों लद्दाख, सियाचिन जैसे इलाकों के लिए डिजाइन किया गया है।सेनाध्यक्ष जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने आज एचएएल में निर्मित होने वाले लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर प्रचंड, एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टर ‘ध्रुव’ और लाइट यूटिलिटी हेलीकॉप्टर (एलयूएच) के हैंगर का भी दौरा किया और चल रहे आॅपरेशन्स और क्षमताओं के बारे में जानकारी हासिल की। उन्होंने एचएएल के अधिकारियों के साथ चर्चा की, जिसका नेतृत्व एचएएल के सीएमडी डॉ. डी. के. सुनील ने किया। साथ ही डायरेक्टर (आॅपरेशंस) रवि के और वरिष्ठ अधिकारियों ने उन्हें खास कार्यक्रम के बारे में जानकारी दी। अधिकारियों से बातचीत करते हुए उन्होंने भारत की रक्षा तैयारियों को मजबूत करने में एचएएल के योगदान की तारीफ की। —
