
नई दिल्ली। सरकारी भर्ती और अन्य सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक पर रोक लगाने के उद्देश्य से लाया गया ‘पब्लिक एग्जामिनेशन (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026’ गुरुवार को राज्यसभा से भी पारित हो गया। इससे पहले यह विधेयक लोकसभा में बुधवार को लंबी चर्चा के बाद मंजूर हो चुका था। दोनों सदनों की स्वीकृति मिलने के बाद अब राष्ट्रपति की मंजूरी के साथ इसके कानून बनने का मार्ग प्रशस्त हो गया है।
केंद्रीय मंत्री **** ने राज्यसभा में विधेयक पेश करते हुए कहा कि सरकार परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि संशोधित कानून के तहत पेपर लीक में शामिल माफिया और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
विधेयक में आर्थिक दंड की अधिकतम सीमा बढ़ाकर 10 करोड़ रुपये कर दी गई है। साथ ही दोषियों के लिए सख्त कारावास, विशेष अदालतों में सुनवाई तथा मामलों के शीघ्र निपटारे के लिए फास्ट-ट्रैक व्यवस्था का प्रावधान किया गया है।
जितेंद्र सिंह ने सदन को बताया कि वर्ष 2024 में लागू मूल कानून के बाद अब तक पेपर लीक से जुड़े 52 एफआईआर दर्ज की गई हैं। उन्होंने दावा किया कि इस कानून के लागू होने के बाद पेपर लीक से जुड़ी आत्महत्याओं की घटनाओं में कमी आई है और सरकार ने अनुभव के आधार पर कानून को और प्रभावी बनाया है।
राज्यसभा में हुई चर्चा के दौरान विपक्ष ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार और अधिक जवाबदेही की मांग की। वहीं सत्ता पक्ष ने कहा कि सरकार ने छात्रों के हित में कई अहम कदम उठाए हैं। इसमें पूर्व शिक्षा मंत्री का इस्तीफा, **** की अध्यक्षता में टास्क फोर्स का गठन तथा गड़बड़ी वाली परीक्षाओं को रद्द कर दोबारा आयोजित करने जैसे फैसलों का उल्लेख किया गया।
अब राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद सरकार संशोधित कानून को अधिसूचित करेगी। सरकार का कहना है कि नया कानून परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाने और नकल एवं पेपर लीक माफिया पर प्रभावी अंकुश लगाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा, जबकि विपक्ष परीक्षा संचालन से जुड़े संस्थानों में व्यापक सुधार की आवश्यकता पर जोर दे रहा है।

