वाशिंगटन । अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को एक और टैरिफ बम फोड़ा। उन्होंने घोषणा की कि उनकी सरकार 1 अक्टूबर, 2025 से ब्रांडेड और पेटेंट वाली दवाओं पर 100 प्रतिशत शुल्क लगाएगी, जब तक कि दवा कंपनियां अमेरिका में उत्पादन संयंत्र नहीं बना रही हों। ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर लिखा, “1 अक्टूबर, 2025 से हम किसी भी ब्रांडेड या पेटेंटेड दवा उत्पाद पर 100% शुल्क लगाएंगे, जब तक कि कंपनी अमेरिका में अपना फार्मास्यूटिकल मैन्युफैक्चरिंग प्लांट बना नहीं रही है। ‘बना रही है’ का मतलब होगा – ‘जमीन पर कार्य शुरू होना’ और/या ‘निर्माणाधीन होना’।”

उन्होंने स्पष्ट किया कि जिन कंपनियों ने पहले से अमेरिका में संयंत्र निर्माण शुरू कर दिया है, उन्हें नए शुल्क से छूट दी जाएगी। “इसलिए, यदि निर्माण शुरू हो चुका है तो इन दवा उत्पादों पर कोई शुल्क नहीं लगेगा। ट्रंप ने घरेलू उपयोग की कई वस्तुओं पर भी भारी शुल्क लगाने की घोषणा की, जिनमें आयातित रसोई कैबिनेट और कुछ तरह के फर्नीचर शामिल हैं। इन उत्पादों की कीमतें हाल के महीनों में पहले ही काफी बढ़ चुकी हैं।

ट्रंप ने एक और पोस्ट में लिखा, “हम 1 अक्टूबर, 2025 से सभी किचन कैबिनेट, बाथरूम वैनिटीज़ और संबंधित उत्पादों पर 50 प्रतिशत शुल्क लगाएंगे। इसके अलावा, असबाबदार (upholstered) फर्नीचर पर 30 प्रतिशत शुल्क लगाया जाएगा।”

ट्रंप द्वारा पहले से लगाए गए विभिन्न शुल्कों ने पिछले एक साल में फर्नीचर की कीमतों को काफी बढ़ा दिया है। अमेरिकी श्रम सांख्यिकी ब्यूरो (BLS) के अनुसार, अगस्त 2024 की तुलना में पिछले महीने फर्नीचर की कीमतें 4.7 प्रतिशत अधिक थीं। विशेष रूप से ड्रॉइंग रूम और डाइनिंग रूम के फर्नीचर की कीमतें पिछले 12 महीनों में 9.5 प्रतिशत तक बढ़ गईं।

फर्नीचर की कीमतें पिछले ढाई साल से घट रही थीं, लेकिन चीन और वियतनाम (जो फर्नीचर के शीर्ष दो निर्यातक देश हैं) पर ट्रंप के शुल्कों के बाद इनमें तेजी आई। अमेरिकी वाणिज्य विभाग के अनुसार, दोनों देशों ने पिछले साल अमेरिका को 12 अरब डॉलर मूल्य का फर्नीचर और फिटिंग्स निर्यात किया था। ट्रंप का कहना है कि विदेशी कंपनियों ने अमेरिकी बाजार को “सस्ते उत्पादों से भर दिया है”, और यह अनुचित व्यापार है। उन्होंने कहा, “यह हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा और उत्पादन क्षमता की रक्षा के लिए ज़रूरी कदम है।”

फार्मास्युटिकल उत्पादों के लिए अमेरिका भारत का सबसे बड़ा निर्यात बाजार है ।इस इंडस्ट्री की बॉडी, फार्मास्यूटिकल्स एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल ऑफ इंडिया के अनुसार, वित्त वर्ष 2024 में, भारत के कुल $27.9 बिलियन मूल्य के फार्मा निर्यात में से 31 प्रतिशत या $8.7 बिलियन अमेरिका गया था. रिपोर्ट के अनुसार, भारत अमेरिका में इस्तेमाल होने वाली 45 प्रतिशत से अधिक जेनेरिक और 15 प्रतिशत बायोसिमिलर दवाओं की आपूर्ति करता है । डॉ रेड्डीज, अरबिंदो फार्मा, जाइडस लाइफसाइंसेज, सन फार्मा और ग्लैंड फार्मा जैसी कंपनियां कथित तौर पर अमेरिकी बाजार से अपने कुल राजस्व का 30-50 प्रतिशत तक कमाती हैं. हालांकि यहां गौर करने वाली बाद है कि भारत मुख्यतः अमेरिका में जेनेरिक दवाइयों का निर्यात करता है जिसे टैरिफ से बाहर रखा गया है। टैरिफ ब्रांडेड दवाइयों पर लगाया गया है।

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