
नई दिल्ली। रेलवे बोर्ड ने अमृत भारत और वंदे भारत स्लीपर ट्रेनों के नियमों में एक बड़ा बदलाव किया है। नौ फरवरी को जारी नए आदेश में उक्त प्रीमियम ट्रेनों में भी इमरजेंसी कोटा (वाईआईपी कोटा) की सुविधा बहाल कर दी गई है। रेलवे बोर्ड के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि शुरुआत में (जनवरी 2026 के नियमों के अनुसार) इन ट्रेनों में केवल लेडीज, सीनियर सिटीजन और दिव्यांग कोटा ही रखा गया था ताकि टिकट प्रणाली पारदर्शी रहे। लेकिन, यात्रियों की भारी मांग और आपातकालीन जरूरतों (जैसे मेडिकल इमरजेंसी या सरकारी ड्यूटी) को देखते हुए अब इसे लागू कर दिया गया है।
उन्होंने बताया कि अलग-अलग ट्रेनों और श्रेणियों के लिए बर्थ की संख्या तय की गई है। अमृत भारत एक्सप्रेस में यह कोटा उन ट्रेनों में लागू होगा जिनमें सात या उससे अधिक स्लीपर कोच हैं। इनमें स्लीपर क्लास में प्रति ट्रेन 24 बर्थ इमरजेंसी कोटा के लिए आरक्षित की गई हैं। वहीं, वंदे भारत स्लीपर में कोच की श्रेणी के आधार पर बर्थ के आवंटन की व्यवस्था है। इसमें सामान्य दिनों और सप्ताहांत के आधार पर कोटे की बर्थ का प्रावधान है। वंदे भारत स्लीपर में एसी-1 में 4 से 6 बर्थ, एसी-2 में 20 से 30 बर्थ, एसी-3 में 24 से 42 बर्थ आरक्षित होंगी। ये सीटें तब तक खाली रहती हैं जब तक चार्ट तैयार नहीं हो जाता। यदि कोई इमरजेंसी रिक्वेस्ट नहीं आती, तो ये सीटें वेटिंग लिस्ट वाले सामान्य यात्रियों को आवंटित कर दी जाती हैं। इस कोटे की बर्थ को मेडिकल इमरजेंसी (गंभीर बीमारी या अस्पताल जाने के लिए यात्रा), पारिवारिक कारण (परिवार में किसी की मृत्यु या अन्य कोई आकस्मिक घटना), सरकारी ड्यूटी (सांसद, मंत्री, हाईकोर्ट-सुप्रीम कोर्ट के जज और ड्यूटी पर तैनात सरकारी अधिकारी) और अन्य नौकरी के इंटरव्यू या बहुत ही महत्वपूर्ण आधिकारिक कार्य के तहत दी जाती हैं।
