पटना। बिहार में नीतीश सरकार के विरुद्ध 20 वर्ष की सत्ता विरोधी लहर को भांपते हुए अबकी बार विधानसभा चुनाव में केंद्रीय गृह मंत्री एवं पूर्व भाजपा अध्यक्ष अमित शाह स्वयं बिहार की कमान संभालने मैदान में उतर गए हैं। दरअसल, राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) में बिहार चुनाव को लेकर रणनीति संबंधित समन्वय में किसी तरह की कोई असमंजस की स्थिति नहीं बने इसे ध्यान में रखते हुए शाह ने स्वयं यह पहल की है।

बिहार राजग के इतिहास में यह पहला मौका है जब भाजपा अघोषित चुनाव प्रभारी के नेतृत्व में मैदान में उतरने जा रही है। इससे भी बिहार में राजग को लेकर भाजपा के शीर्ष नेतृत्व की सूक्ष्म रणनीति एवं दूरदर्शिता का अंदाजा लगाया जा सकता है।

गुरुवार को विधानसभा चुनाव तैयारियों को लेकर दो अलग-अलग क्षेत्रीय कार्यकर्ता सम्मेलन में में जाने से पहले शाह ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से पटना के एक होटल में मुलाकात कर इसके संकेत भी दिए हैं।

शाह के स्वयं कमान संभालने की पीछे लक्ष्य जदयू के शीर्ष नेता नीतीश कुमार, संजय झा, ललन सिंह एवं विजय चौधरी के अतिरिक्त लोजपा (रा) के चिराग पासवान, हम के संरक्षक जीतन राम मांझी के अतिरिक्त रालोमो के राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा के साथ स्पष्ट रूप से सीट बंटवारा से लेकर प्रत्याशी चयन तक संदेश देना है।

इसके साथ ही शाह ने गुरुवार को बिहार में राजग के लिए पिछले दो चुनाव (2020 के विधानसभा एवं 2024 के लोकसभा चुनाव) में सर्वाधिक लचर प्रदर्शन वाले क्षेत्र रहे शाहाबाद एवं मगध क्षेत्र से चुनाव प्रचार अभियान का श्रीगणेश किया।

दोनों बैठक में शाह ने 10-10 संगठनात्मक जिलों के वरिष्ठ नेताओं एवं कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए विकास योजनाओं की उपलब्धियां गिनाई। महागठबंधन (राजद, कांग्रेस एवं वामदल) की सरकार में बिहार की बर्बादी को लेकर लोगों को सजग एवं जागरूक करने की अपील की।

क्षेत्रीय बैठक में शाह की सर्वोपरि प्राथमिकता में बूथ एवं मंडल स्तरीय कार्यकर्ता रहे। दोनों क्षेत्रीय बैठक में शाह ने क्षेत्र विशेष को लेकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की दूर दृष्टि की ओर ध्यान आकृष्ट किया। सीधे-सीधे हर वर्ग एवं व्यक्ति को मिलने वाले आर्थिक लाभ को गिनाया। संबोधन के अंत में शाह ने कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाने का हर संभव प्रयास किया।

24 घंटे में गढ़ा दो महीने का समीकरण : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की जन्मतिथि पर 17 सितंबर की रात नौ बजे पटना पहुंचे एवं 18 सितंबर की रात नौ बजे शाह की पटना से वापसी हुई। इस दौरान शाह का 24 घंटे का पूरा प्रवास चुनावी समीकरणों को साधने में बीता। भाजपा के चाणक्य कहे जाने वाले शाह अबकी बार हार की भरपाई के लिए स्वयं सूक्ष्म प्रबंधन पर काम कर रहे हैं। बिहार भाजपा के शीर्ष नेताओं के साथ पांच अलग-अलग बैठक में पूरे दो महीने के चुनाव प्रचार एवं प्रबंधन को लेकर ब्ल्यू प्रिंट तैयार कर गए।

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