पेरिस (फ्रांस)। मध्य पूर्व ( पश्चिम एशिया) में तनाव कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कूटनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित शांति समझौते के मसौदे पर प्रारंभिक सहमति बन गई है। मसौदे में सैन्य गतिविधियों को रोकने, समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने, आर्थिक प्रतिबंधों में राहत, ईरान के पुनर्निर्माण में सहयोग और परमाणु कार्यक्रम पर निगरानी जैसे कई महत्वपूर्ण प्रावधान शामिल हैं। अमेरिका के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने बुधवार शाम फ्रांस के वर्साय पैलेस में आयोजित रात्रिभोज के दौरान अमेरिका-ईरान समझौते के मसौदे पर आधिकारिक तौर पर हस्ताक्षर किए।व्हाइट हाउस और फॉक्स न्यूज ने अपने एक्स हैंडल पर सबसे पहले इसकी पुष्टि की। इसके बाद यह खबर दुनिया में आग की तरह फैल गई। ईरान के प्रेस टीवी, गल्फ न्यूज, अल जजीरा, सीएनएन, टाइम पत्रिका और सीबीएस न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, इस समझौते में होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने, प्रतिबंधों में राहत, परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत और 60 दिन के भीतर अंतिम समझौते की दिशा में कदम शामिल हैं। बताया जाता है कि ट्रंप और ईरान के राष्ट्रपति ने पेरिस में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से मुलाकात के दौरान इस दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए। यह समझौता तत्काल प्रभाव से लागू भी हो गया है।अमेरिका ने इस दस्तावेज को ‘संयुक्त राज्य अमेरिका और इस्लामी गणराज्य ईरान के बीच इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन’ के रूप में जारी किया है। अमेरिकी प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इस समझौते का मुख्य उद्देश्य होर्मुज जलडमरूमध्य को तुरंत खोलना, ईरान के संवर्धित यूरेनियम भंडार से जुड़े मुद्दों का समाधान करना और प्रतिबंधों में चरणबद्ध राहत देने के लिए एक ढांचा तैयार करना है।ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने पुष्टि की कि समझौते के मसौदे को अंतिम रूप देकर दोनों पक्षों ने उस पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। उन्होंने बताया कि इस विषय पर ओमान और अन्य देशों के साथ काफी समय से परामर्श चल रहा था। साथ ही होर्मुज जलडमरूमध्य के प्रबंधन से जुड़े अधिकांश मुद्दों पर सहमति बन चुकी थी। बघाई ने कहा कि अब समुद्री मार्ग से गुजरने वाले जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित की जाएगी। होर्मुज जलडमरूमध्य पर इस्लामी गणराज्य ईरान की संप्रभुता और अधिकार सुरक्षित रहेंगे।

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