रांची। झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने जेपीएससी की 11वीं से 13वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा के जरिए नियुक्त अफसरों और फूड सेफ्टी ऑफिसर्स की नियुक्ति रद्द करने के सरकार के फैसले पर हाईकोर्ट की अंतरिम रोक के बाद हेमंत सोरेन सरकार पर तीखा जुबानी हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने छात्रों का आंदोलन खत्म कराने के लिए राजनीतिक साजिश के तहत परीक्षाओं और नियुक्तियों को रद्द करने का फैसला लिया था। मरांडी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जारी बयान में कहा कि उन्होंने दो दिन पहले ही आशंका जताई थी कि सरकार का फैसला अदालत में टिक नहीं पाएगा और हाईकोर्ट से इस पर रोक लग सकती है। उन्होंने कहा कि छात्रों के प्रति सरकार की नीयत शुरू से ही ठीक नहीं रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने बिना उचित कानूनी प्रक्रिया अपनाए जेपीएससी और जेएसएससी की परीक्षाओं तथा नियुक्तियों को रद्द करने का फैसला किया। मरांडी ने कहा कि उन्होंने उसी समय कहा था कि इस तरह का निर्णय न्यायिक समीक्षा में टिकना मुश्किल है। नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कथित राजनीतिक साजिश के तहत छात्र आंदोलन को समाप्त कराने के लिए परीक्षा रद्द करने का फैसला लिया। उन्होंने कहा कि सरकार ने आंदोलनकारी छात्रों को कानूनी विशेषज्ञों के साथ बातचीत के लिए बुलाया और भरोसा दिया, लेकिन बाद में खुद ही पीछे हट गई और बंद कमरे में परीक्षाओं को रद्द करने का आदेश जारी कर दिया।मरांडी ने कहा कि उन्होंने सरकार से कैविएट दाखिल करने का आग्रह भी किया था, ताकि मामले के अदालत में जाने की स्थिति में सरकार को अपना पक्ष रखने का अवसर मिल सके और एकतरफा अंतरिम आदेश की स्थिति न बने। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने इस सुझाव पर भी ध्यान नहीं दिया। उन्होंने कहा कि सरकार ने छात्रों को भरोसे में लेकर आंदोलन समाप्त कराया और इसके बाद अदालत में मामला पहुंचने पर नियुक्तियां रद्द करने के फैसले पर रोक लग गई।मरांडी ने कहा कि इससे उनकी ओर से पहले व्यक्त की गई आशंका सही साबित हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की मंशा गलत तरीके से नियुक्त लोगों और उनकी नियुक्ति प्रक्रिया में शामिल जिम्मेदार लोगों को बचाने की है। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी शुरू से ही पूरे मामले की सीबीआई जांच की मांग कर रही है।मरांडी ने कहा कि स्वतंत्र जांच से यह स्पष्ट होना चाहिए कि किन लोगों की नियुक्ति गलत तरीके से हुई और इसके लिए कौन जिम्मेदार है। साथ ही उन्होंने कहा कि जो अभ्यर्थी पूरी पारदर्शिता और निर्धारित प्रक्रिया के तहत चयनित हुए हैं, उन्हें किसी भी तरह का नुकसान नहीं होना चाहिए।बता दें कि झारखंड हाईकोर्ट ने गुरुवार को जेपीएससी की 11वीं से 13वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा और फूड सेफ्टी ऑफिसर की नियुक्ति रद्द करने के राज्य सरकार के आदेश पर अगले आदेश तक रोक लगा दी। अदालत ने राज्य सरकार और जेपीएससी से जवाब मांगा है। सरकार के इस फैसले के खिलाफ सफल और नियुक्त अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट में याचिकाएं दाखिल की थीं।

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