पटना/दरभंगा:

ब्रिटेन में निर्मित लगभग सौ साल पुराने ‘रोडरोलर’ को पटना में संरक्षित किए जाने के बाद विरासत प्रेमियों ने अब बिहार के दरभंगा में जर्जर हालत में पड़े एक विंटेज स्टीम रोलर को सुरक्षित किए जाने की मांग की है।

सांस्कृतिक रूप से समृद्ध मिथिला क्षेत्र के केंद्र दरभंगा के स्थानीय लोगों का कहना है कि यह उपेक्षित रोडरोलर पिछले कई वर्षों से शहर के गंगासागर तालाब के पास जर्जर हालत में पड़ा हुआ है।

इस मशीन की डिजाइन और बनावट पटना संग्रहालय से संरक्षित किए गए जॉन फाउलर रोलर से बहुत मिलती-जुलती है तथा विरासत परिवहन विशेषज्ञों का ऐसा मानना है कि इसे भी उसी कंपनी के द्वारा बनाया होगा और इसकी विशिष्टता भी पटना के रोडरोलर जैसी ही है।

दरभंगा राज्य की राजधानी पटना से लगभग 140 किलोमीटर दूर है।

इंग्लैंड के लीड्स में ‘जॉन फाउलर एंड कंपनी’ द्वारा निर्मित लगभग एक सदी पुराना भाप चालित रोडरोलर लगभग दो साल पहले तक पटना जिला बोर्ड के कब्जे में था और अब ध्वस्त हो चुके पटना समाहरणालय के परिसर के एक कोने में पड़ा था। इसे 24-25 अगस्त, 2022 की मध्यरात्रि पटना संग्रहालय में लाया गया था।

लगभग 18 महीने तक संग्रहालय के परिसर में बुरी हालत में पड़े रहने के बाद कुछ महीने पहले इस ब्रिटिशकालीन भाप चालित रोडरोलर को पटना में सड़क निर्माण अधिकारियों ने संरक्षित कर लिया था।

बुनियादी रखरखाव के बाद, रोलर को फिलहाल पटना में राज्य के सड़क निर्माण विभाग की एक यांत्रिक कार्यशाला में एक शेड के नीचे रखा गया है।

दरभंगा के मूल निवासी नारायण चौधरी का कहना है कि उन्होंने स्थानीय संग्रहालय अधिकारियों से दरभंगा के रोडरोलर को तुरंत संरक्षित करने की मांग की थी।

उन्होंने ‘पीटीआई-’ से कहा, ‘‘पिछले साल नवंबर में भी मैंने दरभंगा में संग्रहालय अधिकारियों से संपर्क कर इस विरासत को बचाने का आग्रह किया था, लेकिन कोई कदम नहीं उठाया गया।’’

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