अहमदाबाद। 12 जून 2025… तारीख जो अहमदाबाद के इतिहास में खौफ और दर्द की काली स्याही से दर्ज हो गई। लोगों ने कभी नहीं सोचा था कि आसमान से मौत इस तरह उतर आएगी… वो भी मेडिकल के मासूम छात्रों के आशियाने में। दोपहर में लंच का समय था। बीजे मेडिकल कॉलेज के हॉस्टल में ज़िंदगी अपनी आम रफ़्तार से चल रही थी। कुछ बच्चे लंच के लिए कमरे से बाहर निकले थे, कुछ थालियों में खाना परोस रहे थे… कोई किताबों में खोया था, तो कोई मां-पापा को फोन लगाने की सोच रहा था। तभी… एक भयानक गर्जना हुई… जैसे आसमान चीख उठा हो।

देखते ही देखते प्लेन हॉस्टल की इमारत से आ टकराया। हाहाकार मच गया। चीखें… धुआं… भागदौड़… और चारों तरफ बिखरा मलबा। मौत की ऐसी दस्तक कि कई जिंदगियां थम गईं।
बताया जा रहा है कि इस भयानक हादसे में कई छात्रों के मारे जाने की आशंका है। हालांकि प्रशासन ने अभी पुष्टि नहीं की है, लेकिन मौके से आई तस्वीरें बहुत कुछ कह रही हैं। थालियों में रखा बचा हुआ खाना, बिखरी किताबें, टूटी दीवारें… जैसे चीख-चीखकर बता रही हों कि कुछ पल पहले यहाँ ज़िंदगी थी, सपने थे, उम्मीदें थीं… और अगले ही पल मौत का साया छा गया।
हॉस्टल में रहने वाले छात्रों की मां-बाप जब इस खबर से टूटे दिल के साथ अस्पताल पहुंचे तो हर चेहरा सफेद था, हर आंख में दहशत। रमीला नाम की मां ने काँपती आवाज़ में बताया– “मेरा बेटा लंच ब्रेक में हॉस्टल गया था… ऊपर से प्लेन गिर गया… वो किसी तरह दूसरी मंज़िल से कूद गया… चोटें आईं हैं… पर वो जिंदा है… मेरी तो सांस ही रुक गई थी…”
कितनी माँओं के लिए ये राहत की खबर थी… और कितनों के लिए ज़िंदगी का सबसे बुरा सच… इस सवाल का जवाब शायद कल या परसों मिलेगा, जब मलबा हटेगा… जब पहचान होगी… तब पता चलेगा कि कौन बेटा वापस नहीं आया।
एक चश्मदीद का कहना था– “200 मीटर दूर मेरा ऑफिस है। ज़ोरदार धमाका हुआ। मैं भागकर बाहर आया। सब तरफ धुआं था… जलती इमारत… मलबा… चीखें।”
पूनम पटेल, जो अपनी भाभी को लंदन की फ्लाइट में विदा करने आई थीं, खुद सदमे में हैं। बोलीं– “एक घंटे बाद खबर मिली… प्लेन क्रैश हो गया… मैं तो जैसे पत्थर हो गई।”
ये सिर्फ हादसा नहीं था… ये कई परिवारों की उम्मीदों का टूट जाना था।किसी मां के बेटे की MBBS की डिग्री का सपना खत्म हुआ, तो किसी बाप के माथे की लकीरें और गहरी हो गईं।
बीजे मेडिकल कॉलेज के हॉस्टल की दीवारें आज गवाही दे रही हैं कि मौत कितनी बेपरवाह होती है। थालियों में अधूरा खाना, बिखरी कॉपियां… वो पल जिनमें कुछ सपने पूरे होने वाले थे, अचानक छीन लिए गए।
अब हर माँ ये दुआ कर रही है– “मेरा बच्चा सही सलामत लौट आए…” पर कुछ मांओं की ममता हमेशा के लिए ख़ामोश हो गई।
अहमदाबाद के इस प्लेन क्रैश ने ये सिखा दिया कि ज़िंदगी कितनी नाज़ुक डोरी है… कब, कहां टूट जाए कोई नहीं जानता।

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