
पटना। बिहार सरकार ने विभिन्न समितियों और परिषदों में कई नेताओं को नई जिम्मेदारियां सौंपी हैं। इसी क्रम में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पूर्व सुरक्षा प्रमुख रहे हरेंद्र बहादुर सिंह को राज्य नागरिक परिषद का महासचिव नियुक्त किया गया है। यह पद जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के कोटे में गया है। उनकी नियुक्ति के साथ ही लंबे समय से उनके राजनीति में सक्रिय होने की चर्चाओं पर भी विराम लग गया है।
हरेंद्र बहादुर सिंह मूल रूप से भोजपुर जिले के रहने वाले हैं। वह लंबे समय तक नीतीश कुमार की सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े रहे हैं। इसके अलावा उन्हें कई मौकों पर निशांत कुमार के साथ भी देखा गया है। राज्य नागरिक परिषद के महासचिव पद पर पहले जदयू के छोटू सिंह थे। पार्टी से निष्कासन के बाद अब उनकी जगह हरेंद्र सिंह को जिम्मेदारी दी गई है।
कई नेताओं को मिली अहम जिम्मेदारी
बिहार सरकार के मंत्रिमंडल सचिवालय की ओर से जारी अधिसूचना में विभिन्न समितियों और परिषदों में सदस्यों एवं पदाधिकारियों की नियुक्ति की गई है। सीवान से 2019 में सांसद रह चुकीं कविता सिंह के पति अजय सिंह को राज्य नागरिक परिषद का उपाध्यक्ष बनाया गया है।
वहीं, लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रदेश अध्यक्ष सुरेंद्र विवेक को भी नई जिम्मेदारी दी गई है। राष्ट्रीय लोक मोर्चा के विधायक आलोक सिंह और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा से जुड़े तथा टेकारी के पूर्व विधायक अनिल सिंह को 20 सूत्री कार्यक्रम का सदस्य बनाया गया है।
सहयोगी दलों के नेताओं का भी हुआ समायोजन
सरकार की ओर से की गई इन नियुक्तियों में सत्तारूढ़ गठबंधन के विभिन्न घटक दलों के नेताओं को भी जगह मिली है। कई नेताओं को समितियों और 20 सूत्री कार्यक्रम में पद देकर राजनीतिक रूप से समायोजित किया गया है। इन नियुक्तियों के जरिए गठबंधन के भीतर अलग-अलग कारणों से पद से दूर रहे नेताओं को नई जिम्मेदारियां मिलने का रास्ता साफ हुआ है।
राजनीतिक हलकों में इन नियुक्तियों को सरकार की संतुलन और समायोजन की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि अलग-अलग सहयोगी दलों और सत्ता पक्ष के नेताओं को जिम्मेदारियां देकर सरकार ने संगठन और गठबंधन के भीतर संतुलन साधने की कोशिश की है।
