
पटना। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने वर्ष 2027 की कक्षा 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं की डेटशीट जारी कर दी है। दोनों कक्षाओं की परीक्षाएं 16 फरवरी 2027 से शुरू होंगी। बोर्ड ने परीक्षा शुरू होने से 101 दिन पहले ही समय-सारिणी जारी कर दी है। इससे विद्यार्थियों को अपनी तैयारी की रणनीति बनाने और विषयवार पढ़ाई के लिए पर्याप्त समय मिल सकेगा।



इस बार 10वीं में 83 और 12वीं में 121 विषयों की परीक्षाएं आयोजित की जाएंगी। सीबीएसई की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार, दोनों कक्षाओं को मिलाकर 46.3 लाख से अधिक विद्यार्थी बोर्ड परीक्षा में शामिल होंगे।
सीबीएसई की वर्ष 2027 की बोर्ड परीक्षाओं में कक्षा 10वीं के करीब 26.5 लाख और 12वीं के 19.8 लाख विद्यार्थियों ने पंजीकरण कराया है। इस तरह कुल परीक्षार्थियों की संख्या 46.3 लाख से अधिक हो गई है।
वहीं, बिहार से दोनों कक्षाओं को मिलाकर करीब 1.25 लाख विद्यार्थी परीक्षा में शामिल होंगे। डेटशीट पहले जारी होने से विद्यार्थियों के साथ अभिभावकों और शिक्षकों को भी परीक्षा की तैयारी और अन्य गतिविधियों की योजना बनाने में सहूलियत होगी।
सीबीएसई ने परीक्षा कार्यक्रम तैयार करते समय विद्यार्थियों के विषय संयोजनों का विशेष ध्यान रखा है। बोर्ड के अनुसार, 40 हजार से अधिक विषय संयोजनों का विश्लेषण कर डेटशीट तैयार की गई है, ताकि किसी विद्यार्थी के दो विषयों की परीक्षा एक ही दिन न पड़े।
इसके अलावा, सामान्य रूप से एक साथ चुने जाने वाले विषयों के बीच भी पर्याप्त अंतराल रखा गया है। कक्षा 12वीं के विद्यार्थियों की सुविधा के लिए प्रमुख प्रवेश परीक्षाओं के संभावित कार्यक्रम को भी ध्यान में रखा गया है, ताकि बोर्ड परीक्षा के बाद उन्हें आगे की तैयारी का समय मिल सके।
सुबह 10:30 बजे से शुरू होंगी परीक्षाएं : सीबीएसई के निर्देश के अनुसार, सभी बोर्ड परीक्षाएं सुबह 10:30 बजे से शुरू होंगी। परीक्षा केंद्रों पर परीक्षार्थियों की संख्या और व्यवस्थाओं को ध्यान में रखते हुए कार्यक्रम तैयार किया गया है।
बोर्ड ने मूल्यांकन प्रक्रिया के दौरान शिक्षकों को लंबे समय तक स्कूलों से अनुपस्थित रहने की स्थिति से बचाने का भी प्रयास किया है। समय पर परीक्षार्थियों की सूची (एलओसी) जमा होने के कारण इस बार डेटशीट पहले जारी करना संभव हुआ है।
विद्यार्थियों से लेकर स्कूलों तक को मिलेगा तैयारी का समय
परीक्षा कार्यक्रम पहले जारी होने से विद्यार्थियों को पढ़ाई की बेहतर योजना बनाने में मदद मिलेगी। अभिभावक और शिक्षक भी परीक्षा के अनुसार अपनी गतिविधियों और यात्रा की योजना बना सकेंगे।
इसके साथ ही गैर-बोर्ड कक्षाओं की पढ़ाई प्रभावित होने की आशंका कम होगी। परीक्षा केंद्र बनने वाले स्कूलों को भी आवश्यक व्यवस्थाएं पूरी करने के लिए पर्याप्त समय मिलेगा।

