
रांची। झारखंड हाईकोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारियों के खिलाफ एससी-एसटी अधिनियम के तहत दर्ज मामले में जवाब दाखिल न करने पर कड़ी नाराजगी जताई है। अदालत ने इस मामले में देरी और बार-बार समय मांगे जाने पर कड़ा रुख अपनाते हुए जुर्माना लगाया है। साथ ही, इस पूरी कानूनी प्रक्रिया में अगली सुनवाई के लिए 9 दिसंबर की तारीख तय की गई है। यह पूरा कानूनी विवाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन द्वारा दर्ज कराई गई उस प्राथमिकी (FIR) से जुड़ा है, जिसमें उन्होंने ईडी के तत्कालीन अधिकारियों (जिनमें कपिल राज, देवव्रत झा और अन्य शामिल हैं) पर पूछताछ और कार्रवाई के दौरान कथित तौर पर प्रताड़ित करने का गंभीर आरोप लगाया था। मुख्यमंत्री की शिकायत के आधार पर दर्ज इस मामले के खिलाफ ईडी के अधिकारियों ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर इस प्राथमिकी और इसके आधार पर चल रही जांच की पूरी कार्रवाई को रद्द करने की मांग की है।



झालसा में जमा करनी होगी राशि
सुनवाई के दौरान जब राज्य सरकार और पक्ष की ओर से तय समय पर जवाब दाखिल नहीं किया गया और बार-बार स्थगन की मांग की गई, तो अदालत ने इस पर असंतोष जताया। हाईकोर्ट ने इस मामले में पूर्व में दिए गए निर्देशों का पालन न होने पर जुर्माना लगाया है। अदालत ने निर्देश दिया है कि जुर्माने की यह राशि झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण में जमा कराई जाए।
केंद्र और राज्य की जांच एजेंसियों के बीच चल रहे इस हाई-प्रोफाइल कानूनी टकराव पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं। एक तरफ जहां ईडी अधिकारियों ने अपने ऊपर दर्ज एससी-एसटी एक्ट के मुकदमे को कवचहीन और राजनीति से प्रेरित बताते हुए उसे खारिज करने की गुहार लगाई है। वहीं दूसरी ओर अदालती प्रक्रिया में हो रही देरी पर न्यायपालिका का सख्त रवैया इस मामले को और महत्वपूर्ण बना रहा है। अब सबकी नजरें आगामी 9 दिसंबर को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां अदालत के रुख और आगे की कानूनी कार्यवाही पर सबकी निगाहें रहेंगी।

