
नई दिल्ली। दुलारचंद यादव हत्याकांड में आरोपी मोकामा के पूर्व विधायक अनंत सिंह को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। शीर्ष अदालत ने उनकी जमानत को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए उन्हें एक दिसंबर तक सरेंडर करने का आदेश दिया है। साथ ही अदालत ने मामले की जांच चार महीने के भीतर पूरी करने का निर्देश भी दिया है।



अनंत सिंह को पटना हाईकोर्ट से मिली जमानत को मृतक दुलारचंद यादव के पोते नीरज कुमार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। इसी याचिका पर सुनवाई के दौरान अदालत ने यह आदेश जारी किया।
दरअसल, बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के दौरान 30 अक्टूबर को पटना जिले के बाढ़ अनुमंडल स्थित बसावनचक गांव में जन सुराज पार्टी के समर्थक दुलारचंद यादव की हत्या कर दी गई थी। बताया गया था कि मोकामा से तत्कालीन जदयू प्रत्याशी अनंत सिंह और जन सुराज पार्टी के उम्मीदवार पीयूष प्रियदर्शी के समर्थकों के बीच हिंसक झड़प हुई थी। इसी दौरान दुलारचंद यादव की मौत हो गई थी।
परिजनों ने लगाया था कुचलने और गोली मारने का आरोप
इस मामले में आरोप है कि धर्मवीर सिंह और कर्मवीर सिंह ने दुलारचंद यादव को उनकी गाड़ी से जबरन बाहर निकाला था। पीड़ित परिवार का आरोप है कि इसके बाद आरोपियों और उनके साथियों ने उन्हें गाड़ी से कुचल दिया और गोली भी मारी।
हालांकि, पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में मौत का कारण गोली लगना नहीं, बल्कि कार्डियो-रेस्पिरेटरी फेलियर बताया गया था। रिपोर्ट के मुताबिक, शरीर पर मिले चोट के निशान किसी भारी वाहन की टक्कर से लगी चोटों से मेल खाते थे।
हाईकोर्ट से मिली थी जमानत
हत्याकांड में गिरफ्तारी के बाद अनंत सिंह की जमानत याचिका एमपी-एमएलए कोर्ट ने खारिज कर दी थी। हालांकि, बाद में पटना हाईकोर्ट ने 19 मार्च को उन्हें जमानत दे दी थी। इसके बाद 23 मार्च को वह जेल से बाहर आ गए थे।
अनंत सिंह ने जेल में रहते हुए विधानसभा चुनाव लड़ा था और पूर्व सांसद सूरजभान सिंह की पत्नी वीणा देवी को हराकर जीत दर्ज की थी। राज्यसभा चुनाव के दौरान भी वह जेल से विधानसभा पहुंचे थे और अपने मताधिकार का प्रयोग किया था।
सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेश के बाद अब अनंत सिंह को एक दिसंबर तक सरेंडर करना होगा।

