
रांची। झारखंड में लगातार हो रही बारिश से कई जलाशय लबालब हो चुके हैं और नदियों का जलस्तर भी तेजी से बढ़ रहा है। जल संसाधन विभाग के आंकड़ों के अनुसार राज्य में कुल 56 जलाशय सूचीबद्ध हैं। इनमें 18 जलाशयों में उपलब्ध पानी उनकी लाइव स्टोरेज क्षमता के 100 प्रतिशत या उससे अधिक पहुंच चुका है, जबकि 10 जलाशयों में 80 से 100 प्रतिशत के बीच पानी है। यानी करीब 30 जलाशय ऐसे हैं, जहां जलस्तर पर लगातार नजर रखनी पड़ रही है। रांची समेत राज्य के कई जिलों में प्रशासन और जल संसाधन विभाग ने निचले इलाकों तथा नदी किनारे बसे गांवों को सतर्क रहने को कहा है। 56 जलाशयों की कुल लाइव स्टोरेज क्षमता 3,16,591.800 हेक्टेयर-मीटर है।



राजधानी रांची के लिए गोंदा, गेतलसूद और हटिया डैम सबसे महत्वपूर्ण जलाशयों में हैं। तीनों में पर्याप्त पानी जमा हो चुका है। गोंदा डैम का जलस्तर 2128 फीट पहुंचने के बाद एक फाटक खोलकर पानी छोड़ा गया। वहीं गेतलसूद डैम में भी जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। अब तक 90 प्रतिशत कैचमेंट एरिया भर चुका है। इसमें लाइव स्टोरेज फुल रिजरवायर लेबल 22469.13 हेक्टेयर मीटर है, जिसमें 16520.67 हेक्टेयर मीटर पानी है। इस डैम का डेड स्टोरेज लेबल (डीएसएल) 579.27 मीटर है। वहीं एफआरएल 590.24 मीटर है। वर्तमान में वाटर लेबल (पीडब्ल्यूएल) 588.41 मीटर है, जो डेड स्टोरेज लेबल से ज्यादा है। डैम का जलस्तर 1933 आरएल फीट दर्ज किया गया। डैम की अधिकतम जलधारण क्षमता 1936 आरएल फीट है। जलस्तर 1933.5 आरएल फीट पहुंचते ही डैम के रेडियल गेट फिर से खोले जा सकते हैं। हटिया डैम में भी अच्छी मात्रा में पानी जमा है। हालांकि इसका जलस्तर अभी अधिकतम जलस्तर से करीब पांच फीट नीचे बताया जा रहा है। रांची के लोगों के लिए यह राहत की बात है कि तीनों प्रमुख जलाशयों में पानी की स्थिति बेहतर हुई है, लेकिन नदी किनारे और निचले इलाकों में रहने वालों के लिए बढ़ता जलस्तर चिंता का कारण है। इंजीनियरों के अनुसार रांची के प्रमुख तीनों डैम में पर्याप्त पानी एकत्र हो गया है।
नौ जलाशयों से छोड़ा गया पानी : जलस्तर बढ़ने के कारण प्रदेश के कुल नौ जलाशयों से पानी छोड़ा गया है। जल संसाधन विभाग लगातार जलाशयों के जलस्तर, इनफ्लो और आउटफ्लो की निगरानी कर रहा है। विभाग ने 56 जलाशयों की निगरानी के लिए पांच चीफ इंजीनियरों को जिम्मेदारी दी है।
रांची चीफ इंजीनियर के अधीन आने वाले 21 जलाशयों में से 12 में पानी पूरी क्षमता तक पहुंच चुका है। हजारीबाग क्षेत्र के 13 में से आठ जलाशय भी शतप्रतिशत भर चुके हैं। जिन नौ जलाशयों से पानी छोड़ा गया उसमें गेतलसूद, गोंदा, व्यांगबिल, खरकई, गालूडीह, चांडिल और गंजिया बाराज शामिल है। बारिश का असर नदियों पर भी साफ दिखाई दे रहा है। रांची में स्वर्णरेखा, हरमू और पोटपोटो नदी का जलस्तर बढ़ रहा है। वहीं दामोदर, पंचेत, कोयल और बराकर नदी में भी पानी बढ़ा है। कोल्हान क्षेत्र में सोन, संजय, सुरू और शंख नदियां उफान पर हैं। सरायकेला क्षेत्र में खरकई नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। संजय नदी कई स्थानों पर खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। सिमडेगा-खूंटी मुख्य मार्ग पर पेलौल गांव के पास बनई नदी में भी पानी बढ़ने से लोगों को सतर्क किया गया है।
मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों में राज्य के कई हिस्सों में भारी बारिश की संभावना जताई है। इसे देखते हुए रांची, देवघर, दुमका, गिरिडीह, गोड्डा, जामताड़ा, पाकुड़, साहिबगंज, हजारीबाग, कोडरमा, लोहरदगा, गुमला, सिमडेगा, रामगढ़, खूंटी, बोकारो और धनबाद समेत कई जिलों में सतर्कता बढ़ाई गई है। पश्चिमी सिंहभूम, पूर्वी सिंहभूम और सरायकेला-खरसावां में भी भारी बारिश की संभावना को देखते हुए निगरानी बढ़ाई गई है।

