
पटना। स्कूल-कॉलेज और बाजार में लड़कियों और महिलाओं से छेड़खानी करने वाले मनचलों को सबक सिखाने के लिए अब सिर्फ भइया नहीं, पुलिस दीदी (अभया ब्रिगेड) भी आएगी। राज्य के सभी जिलों में स्कूटी सवार पुलिस दीदी की 2500 टीमों का गठन किया जाना है, जिसमें पहले चरण में एक हजार से अधिक टीमों का गठन कर लिया गया है।गुरुवार को पटना के कुछ इलाकों में स्कूटी सवार पुलिस दीदी की गश्ती शुरू हो गई है। रक्षाबंधन से अन्य जिलों में भी स्कूटी सवार पुलिस दीदी की गश्ती होने लगेगी। पुलिस दीदी की टीम को डायल-112 से भी टैग किया जाएगा, ताकि आपात स्थिति या जरूरत के समय नजदीकी पुलिस बल की मदद ली जा सके। इसके अलावा पुलिस दीदी की अन्य टीमों की भी इंटर टैगिंग होगी, ताकि आवश्यकता अनुसार एक-दूसरे का सहयोग लिया जा सके। पुलिस मुख्यालय के अनुसार, महिलाओं और लड़कियों के विरुद्ध होने वाली आपराधिक घटनाओं को रोकने के लिए हॉट-स्पॉट चिह्नित करने का काम भी शुरू हो गया है।स्कूल-कॉलेज, हॉस्टल, कोचिंग संस्थान, शापिंग माल, पार्क, सिनेमा हॉल, मेला, बाजार, हाट के साथ ऐसे सभी स्थानों को चिह्नित किया जा रहा है, जहां लड़कियों के साथ छेड़छाड़ की संभावना बनी रहती है। इन हॉट-स्पॉट की सुरक्षा पुलिस दीदी के जिम्मे होगी।हर टीम में महिला एएसआई, प्रशिक्षण भी मिलेगा: इस साल जनवरी में गठित अभया ब्रिगेड की टीम को ही अपग्रेड कर पुलिस दीदी का रूप दिया जा रहा है। इसके लिए संरचना में थोड़ा संशोधन हुआ है। प्रत्येक टीम में एक महिला एएसआई (सहायक अवर निरीक्षक) या पीटीसी को प्रभारी बनाते हुए एक महिला सिपाही को सदस्य के रूप में शामिल किया जाएगा। पुलिस दीदी की महिला पुलिसकर्मियों को क्षेत्रीय स्तर पर दो सप्ताह का प्रशिक्षण दिया जाएगा जिसमें महिलाओं एवं लड़कियों से जुड़े कानून, आत्मरक्षा, सीपीआर, बाडी-वार्न कैमरा, पेपर स्प्रे आदि से जुड़ी जानकारी दी जाएगी।नाबालिगों के विरुद्ध एफआईआर नहीं, एसआईआर: पुलिस दीदी की टीम अपने-अपने थाना क्षेत्र के हॉट-स्पॉट का नियमित भ्रमण एवं निगरानी करेंगी। टीम में शामिल महिला पुलिसकर्मी महिलाओं और बालिकाओं से बातचीत कर उनकी समस्याओं को समझेंगी तथा छेड़छाड़ करने वालों के विरुद्ध विधिसम्मत कार्रवाई करेगी।आवश्यकता पड़ने पर पीड़ित छात्राओं की काउंसलिंग भी कराई जाएगी। नाबालिग से जुड़े मामलों में एफआईआर (फर्स्ट इंफॉर्मेशन रिपोर्ट) की जगह एसआईआर (सोशल इन्वेस्टिगेशन रिपोर्ट) तैयार की जाएगी जिसे किशोर न्याय पर्षद के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। पुलिस दीदी की टीम स्कूल-कॉलेज के प्राचार्यों, शिक्षकों, महिला छात्रावास के वार्डन तथा कोचिंग संस्थानों के संचालकों से भी समन्वय कर लड़कियों की समस्याओं की जानकारी लेंगी।




