
रांची। झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितता की जांच में सीआईडी को लगातार नए तथ्य सामने आ रहे हैं। जांच एजेंसी के अनुसार, आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष एल. खियांगते को जनवरी 2026 में ही परीक्षा में गड़बड़ी से संबंधित लिखित शिकायत मिल गई थी। शिकायत में टीडीपीएल के कर्मचारी अभय तिवारी पर सैकड़ों OMR शीट में कथित हेरफेर करने का आरोप लगाया गया था।



सीआईडी के मुताबिक, शिकायत मिलने के बावजूद मामले में तत्काल ठोस कार्रवाई नहीं किए जाने का आरोप है। बाद में छात्रों के व्यापक आंदोलन और मामले के तूल पकड़ने के बाद जांच तेज हुई। सीआईडी ने 10 अगस्त 2026 को पूर्व जेपीएससी अध्यक्ष एल. खियांगते को गिरफ्तार किया। अब जांच एजेंसी कथित मिलीभगत के स्तर और वित्तीय लेन-देन की कड़ियों की जांच कर रही है।
पूछताछ में कई अहम खुलासे
कथित घोटाले की जांच के दौरान गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ में सीआईडी को कई महत्वपूर्ण जानकारियां मिली हैं। उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता और 14वीं सिविल सेवा परीक्षा की प्रारंभिक परीक्षा में सफल अभ्यर्थी सुमन सौरभ के बयानों में परीक्षा प्रक्रिया और कथित गड़बड़ी से जुड़े अलग-अलग तथ्य सामने आए हैं।
श्वेता गुप्ता ने पूछताछ में अनियमितता की बात स्वीकार करने के साथ इसकी जिम्मेदारी तत्कालीन अध्यक्ष पर डाली है। वहीं, हजारीबाग के बड़कागांव निवासी सुमन सौरभ ने कथित तौर पर परीक्षा में चयन कराने के लिए एजेंट पवन सिंह से 80 लाख रुपये में सौदा तय होने की जानकारी दी है।
सौरभ के बयान के अनुसार, रकम तीन चरणों में दी जानी थी—20 लाख रुपये प्रारंभिक परीक्षा से पहले, 40 लाख मुख्य परीक्षा से पहले और 20 लाख रुपये साक्षात्कार से पहले।
16 लाख रुपये देने का दावा
सौरभ ने सीआईडी को बताया कि वर्ष 2020 में स्नातक करने के बाद वह दो बार जेपीएससी और एक बार जेएसएससी सीजीएल परीक्षा में असफल हुआ था। इसके बाद दोस्त दिवाकर के मामा प्रकाश कुमार के माध्यम से उसकी मुलाकात पवन सिंह से हुई।
आरोप है कि पवन सिंह ने उसे परीक्षा में केवल बताए गए सवालों के उत्तर भरने और बाकी OMR शीट खाली छोड़ने को कहा था। सौरभ के अनुसार, 19 अप्रैल 2026 को बोकारो केंद्र पर आयोजित 14वीं जेपीएससी प्रारंभिक परीक्षा की दोनों पालियों में उसने क्रमशः 38 और 48 प्रश्न हल किए।
सौरभ के मुताबिक, परीक्षा के बाद उसके पिता के बैंक खाते से पवन सिंह के एक्सिस बैंक खाते में चार किस्तों में 12 लाख रुपये भेजे गए। 2 जुलाई 2026 को रिजल्ट जारी होने के बाद चार लाख रुपये और दिए गए। इस तरह कुल 16 लाख रुपये दिए जाने का दावा किया गया है। OMR शीट की तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामला सामने आया। सीआईडी अब सौरभ और पवन सिंह के बैंक खातों में हुए लेन-देन की जांच कर रही है।
अध्यक्ष के निर्देश पर रिजल्ट तैयार करने का दावा
सीआईडी रिमांड पर पूछताछ के दौरान उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता ने खुद को निर्दोष बताते हुए दावा किया कि 11वीं और 13वीं जेपीएससी का परीक्षाफल तत्कालीन अध्यक्ष एल. खियांगते के निर्देश पर तैयार कर प्रकाशित किया गया था।
उनके अनुसार, दस्तावेज सत्यापन के लिए उप सचिव सरोजनी तिर्की की अध्यक्षता में टीम गठित की गई थी। तैयार रिजल्ट जेपीएससी सदस्यों डॉ. अजिता भट्टाचार्य, डॉ. जमाल अहमद और डॉ. अनिमा हांसदा के पास भेजा गया था।
टीडीपीएल कर्मियों की भूमिका भी जांच के घेरे में
श्वेता गुप्ता के बयान के अनुसार, परीक्षा संचालन करने वाली एजेंसी टीडीपीएल के कर्मचारी उस्मान, एबाद, संजय कुमार और हेमंत तथा निदेशक रामवीर और सतपाल परीक्षा संचालन और OMR शीट से जुड़े कार्य देखते थे। शीट और उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैनिंग का काम प्रमोद तिवारी द्वारा किए जाने की बात भी सामने आई है।
आरोप है कि कंप्यूटर ऑपरेटर धर्मेंद्र प्रश्नपत्र आउट करने के लिए दबाव बना रहा था। श्वेता गुप्ता के अनुसार, रामवीर के कहने पर उन्होंने इसकी शिकायत तत्कालीन अध्यक्ष से की थी। उन्होंने यह भी दावा किया कि टीडीपीएल का इंपैनलमेंट अध्यक्ष के आदेश पर हुआ था।
सीआईडी के अनुसार, स्कैनिंग कक्ष में लगे CCTV कैमरों की निगरानी भी तत्कालीन अध्यक्ष द्वारा किए जाने की बात पूछताछ में सामने आई है। जांच एजेंसी अब इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि कर रही है और कथित घोटाले में शामिल अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।

