
रांची । झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर रांची के ऐतिहासिक मोरहाबादी मैदान में तिरंगा फहराया। ध्वजारोहण के बाद उन्होंने परेड का निरीक्षण किया और राज्यवासियों को संबोधित किया। मुख्यमंत्री ने राज्य के युवाओं को भरोसा दिलाया कि उनकी मेहनत और भविष्य की रक्षा के लिए उनकी सरकार ठोस कदम उठाएगी। उन्होंने कहा कि भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए प्रयासों में कोई कमी नहीं रहने दी जाएगी। जेपीएससी और अन्य भर्ती एजेंसियों के जरिए समयबद्ध तरीके से नियुक्तियां की जाएंगी। वार्षिक परीक्षा कैलेंडर जारी करने तथा ओएमआर और उत्तर कुंजी समय पर उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाएगी। उन्होंने कहा कि किसी भी भ्रष्ट तंत्र या अनियमितता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होगी।



अपने संबोधन की शुरुआत मुख्यमंत्री ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद और डॉ. भीमराव अंबेडकर समेत देश के स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धांजलि देकर की। उन्होंने झारखंड के अमर नायकों भगवान बिरसा मुंडा, सिद्धू-कानू, चांद-भैरव, तिलका मांझी, फूलो-झानो, नीलांबर-पीतांबर और शेख भिखारी को भी नमन किया। मुख्यमंत्री ने शिबू सोरेन के संघर्षों को याद करते हुए कहा कि उनका पूरा जीवन जल, जंगल, जमीन और आदिवासी अस्मिता की रक्षा के लिए समर्पित रहा है।
उन्होंने कहा कि देश स्वतंत्रता की 80वीं वर्षगांठ मना रहा है और झारखंड अपने गठन के 25वें वर्ष में प्रवेश कर चुका है। यह राज्य के लिए आगे की दिशा तय करने का महत्वपूर्ण अवसर है। भर्ती परीक्षाओं को लेकर चल रहे छात्र आंदोलन का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि देश के अलग-अलग हिस्सों में पेपर लीक की घटनाएं सामने आई हैं, लेकिन दूसरे राज्यों में जो हुआ, उससे झारखंड अपनी जिम्मेदारी से पीछे नहीं हट सकता।
उन्होंने कहा कि परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए सरकार ने ‘छात्रों की बात छात्रों के साथ’ अभियान शुरू किया है। इसके तहत विद्यार्थियों, शिक्षकों और विशेषज्ञों से सुझाव लेकर नियमों के दायरे में जरूरी बदलाव किए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य केवल सरकारी पदों को भरना नहीं है। एमएसएमई, कृषि, डेयरी, मत्स्य पालन, पर्यटन, डिजिटल सेवाओं और स्टार्टअप के क्षेत्र में भी रोजगार के नए अवसर पैदा किए जाएंगे।
झारखंड के विकास मॉडल पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि दुनिया आज जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण संरक्षण की चुनौतियों से जूझ रही है, जबकि झारखंड की पारंपरिक जीवनशैली सदियों से प्रकृति के साथ संतुलन पर आधारित रही है। उन्होंने कहा कि राज्य की पहचान केवल खनिज संपदा के दोहन से नहीं, बल्कि सतत विकास, पारंपरिक ज्ञान और सामाजिक न्याय पर आधारित मॉडल से होनी चाहिए।
उन्होंने बताया कि सरकार लाह, तसर, औषधीय पौधों और लघु वनोपज को बेहतर बाजार से जोड़ने की दिशा में काम कर रही है। वैल्यू एडिशन और ब्रांडिंग के जरिए इनसे जुड़े परिवारों की आय बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। ग्राम सभा, स्थानीय ज्ञान और आधुनिक तकनीक को साथ लेकर विकास की नई व्यवस्था तैयार की जाएगी।

