
रांची। रामगढ़ राधागोविंद विश्वविद्यालय से संबंधित रिपोर्ट उच्च शिक्षा विभाग के मंत्री के पास भेज दी गई है।रिपोर्ट में इस बात की भी जानकारी है कि यह विवि किस प्रकार से अवैध गतिविधियों का केंद्र बना हुआ है और कैसे यहां से फर्जी डिग्री बांटने का कारोबार फल-फूल रहा था। दरअसल, यह विश्वविद्यालय विगत कुछ महीनों में ही शैक्षणिक घोटालों का अड्डा बन चुका है। इसका प्रमाण एक साथ 33 अभ्यर्थियों के महिला पर्यवेक्षिका की परीक्षा में सफलता मिलने के बाद और पुख्ता हो गया।



महिला एवं बाल विकास विभाग ने इस परिणाम के बाद उच्च शिक्षा विभाग से जांच कराने का आग्रह किया जिसके बाद तीन सदस्यीय कमेटी बनी और अब इस कमेटी ने अपनी रिपोर्ट विभागीय मंत्री को सौंप दी है। विभाग के अपर सचिव के नेतृत्व में बनी कमेटी में रांची विवि के रजिस्ट्रार और एक अन्य पदाधिकारी भी शामिल थे। बताते हैं कि इस कमेटी को विवि के तमाम गोरखधंधों से संबंधित प्रमाण मिले हैं, जिसके बाद कार्रवाई करने की अनुशंसा करते हुए रिपोर्ट उच्च शिक्षा मंत्री को सौंप दी गई है। इस रिपोर्ट पर कार्रवाई हुई तो विवि की मान्यता भी रद की जा सकती है। राज्य सरकार तीन-चार दिनों में इस मामले में निर्णय लेगी। कार्रवाई होने तक विवि की गतिविधियों पर नजर रखी जाएगी।
क्या-क्या गड़बड़ियां मिलीं : उच्च स्तरीय कमेटी की रिपोर्ट अभी सार्वजनिक नहीं हुई है लेकिन माना जा रहा है कि इस समिति को विवि की संदिग्ध गतिविधियों को प्रमाण मिला है। शिकायतें भी भरपूर हैं। कार्रवाई के लिए इन्हीं शिकायतों के आधार पर प्रमाण जुटाया गया है। छात्रों के नामांकन से लेकर उनकी उपस्थिति दर्ज करने से संबंधित संचिकाओं को भी कमेटी ने देखा है। कमेटी की रिपोर्ट में इसका उल्लेख भी है कि कैसे एक ही व्यक्ति हाजिरी बनाने से लेकर बाकी कार्यों को पूरा कर रहा था। इस मामले में सरकार अब कुछ अन्य प्रमुख निजी विवि की भी रिपोर्ट तलब कर सकती है। उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारियों के साथ सरकार की मंशा विवि में फैल रही कदाचार के वातावरण को पूरी तरह से रोकने की है।

